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गुरुवार, 3 नवंबर 2022

नरवर नगर परिषद ने मनाया अनूठा उत्सव, मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर कार्यालय में स्कूली बच्चों ने बनाईं सुन्दर कलाकृतियाँ

नगर परिषद कार्यालय में स्कूली बच्चों ने बनाईं सुंदर कलाकृतियाँ, मंत्री जी ने अवलोकन कर, की सराहना।

नरवर दर्शन. मध्यप्रदेश के 67वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में प्रदेश भर में 01 नवम्बर से 7 नवम्बर तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। जिसके क्रम में नगर परिषद नरवर में भी रंगोली, पेंटिंग्स और स्वच्छता श्रमदाम कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जिसमें नरवर के विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने सुंदर रंगोलियाँ और पेंटिंग्स बना कर नगर परिषद कार्यालय के सुंदरता में चार चाँद लगा दिए।


बच्चों द्वारा बनाई गई रंगोली और पेंटिंग्स का अवलोक श्री जसवंत जाटव, केबिनेट मंत्री दर्जा, मध्यप्रदेश पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम अध्यक्ष ने किया और छात्र-छात्राओं की प्रतिभा की सराहना की। खिलते हुए रंगों और महकते फूलों से बनी रंगोलियों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।


कला और संस्कृति की विशेष परख रखने वाली नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमति पदमा संदीप माहेश्वरी जी ने स्वयं बच्चों के साथ मिलकर रंगोली बनाई और रंगोलियों का अवलोकन कर छात्र-छात्राओं की कलात्मक प्रतिभा की सराहना की और मार्गदर्शन दिया।


स्कूली नन्हें कलाकार बच्चों को संबोधित करते हुए श्री जसवंत जाटव, पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम चेयरमेैन कैबिनेट मंत्री दर्जा ने कहा कि - मध्यप्रदेश अपना 67वां स्थापना दिवस मना रहा है। प्रदेश के मुखिया यशस्वी मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने नईं ऊँचाईयों को छुआ है और कला, संस्कृति, पर्यटन, उद्योग आदि क्षेत्रों में नये कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि नरवर को पर्यटन के क्षेत्र में आगे बढाने के लिए अनेक योजनाएँ तैयार की गयी हैं, जिन्हें अमली जामा पहनाया जा रहा है और हमारा नरवर पर्यटन पटल पर एक प्रमुख स्थान होगा। नरवर के विभिन्न शासकीय-अशासकीय विद्यालयों के बच्चों से रूबरू होते हुए मंत्री जी ने कहा कि जैसे श्री शिवराज सिंह चौहान जी पूरे प्रदेश के बच्चों के मामा हैं, तो आज से मैं करैरा विधानसभा के सभी बालक-बालिकाओं का मामा हूँ। जब मंत्री जी ने बच्चों से पूछा कि क्या आपको मंजूर है, तो सभी बच्चों ने एक सुर हाँ कहकर मामा-भांजे के इस संबंध का समर्थन किया।


कार्यक्रम में रंगोली और पेंटिंग्स बनाने वाले बच्चों को मंत्री जी, अध्यक्ष जी, नप सीएमओ और नप पार्षदगणों द्वारा प्रोत्साहन स्वरूप पुरस्कार प्रदान किये गये। मंत्री जी ने बच्चों की सुन्दर पेंटिग्स पर अपनी स्वेच्छा से ही ऑटोग्राफ दिये और उन्हें संभालकर कार्यालय में प्रदर्शित करने के निर्देश दिये। कार्यक्रम में स्वागत भाषण और आभार उपयंत्री श्री आरके जैन ने दिया और मंच संचालन नगर परिषद के पवन सिंह बैश ने किया।


रंगोली-पेंटिंग्स कार्यक्रम के समापन के बाद पुराना थाना ग्राउण्ड में नपाध्यक्ष एवं पार्षदगणों और निकाय के अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा सफाई मित्रों के साथ श्रमदान किया गया।


मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के इस रंगोली-पेंटिग्स कार्यक्रम में मुख्यरूप से श्री जसवंत जाटव, पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम अध्यक्ष, नगर परिषद नरवर अध्यक्ष श्रीमति पदमा माहेश्वरी, नप उपाध्यक्ष श्री ब्रजेन्द्र गुर्जर, नप सीएमओ श्री प्रवीण कुमार नरवरिया, , नप पार्षदगण श्री धर्मेन्द्र कुशवाह, श्री बालकिशन कुशवाह, श्री राकेश गुड्डू सोनी, श्री शंकरलाल रजक, श्री मनोज मित्तल, श्री टीपू खान एवं नगर परिषद उपयंत्री श्री आरके जैन, लेखापाल श्री अशोक कुमार शिवहरे, एआरआई श्री हबीब मोहम्मद कुर्रैशी, एआरआई श्री धर्मेन्द्र कुमार कोली, श्री दीपक खटीक, श्री अरविन्द शर्मा, श्री गजेन्द्र राठौर, श्री पुरुषोत्तम शिवहरे, श्री पवन सिंह बैश, श्री अंकुर जैन, श्री सुरेश चौरसिया, श्री मनोज सक्सैना, श्री जावेद कुर्रैशी, श्री पंकज चौरसिया, श्री सतीश बाथम, श्री छोटू एवं नरवर की आँगनवाडी कार्यकर्ता/सहायिका एवं शासकीय सीएम राइज विद्यालय, शासकीय कन्या विद्यालय, अशासकीय भारतीय विद्यालय, शौर्य स्कूल, उत्कर्ष विद्यालय के अध्यापक एवं छात्र-छात्राएँ शामिल रहे।

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नरवर दर्शन

सोमवार, 31 अक्टूबर 2022

मध्यप्रदेश गान हिन्दी में | Hindi lyrics of Madhya Pradesh Gaan | मध्यप्रदेश की स्थापना कब हुई? मध्यप्रदेश गान के लेखक कौन हैं? Madhya Pradesh Song

हिंदुस्तान का हृदय प्रदेश कहे जाने वाले मध्यप्रदेश की स्थापना 01 नवम्बर 1956 को हुई और इस वर्ष हम मनाने जा रहे हैं 67 वाँ स्थापना दिवस।
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यहाँ पढ़ें श्री महेश श्रीवास्तव जी द्वारा रचित मध्यप्रदेश गान
मध्यप्रदेश गान

Madhya Pradesh Song

मध्यप्रदेश गान

सुख का दाता सब का साथी शुभ का यह संदेश है,
माँ की गोद, पिता का आश्रय मेरा मध्यप्रदेश है।


विंध्याचल सा भाल नर्मदा का जल जिसके पास है,
यहां ज्ञान विज्ञान कला का लिखा गया इतिहास है।



उर्वर भूमि, सघन वन, रत्न, सम्पदा जहां अशेष है,
स्वर-सौरभ-सुषमा से मंडित मेरा मध्यप्रदेश है।


सुख का दाता सब का साथी शुभ का यह संदेश है,
माँ की गोद, पिता का आश्रय मेरा मध्यप्रदेश है।


चंबल की कल-कल से गुंजित कथा तान, बलिदान की,
खजुराहो में कथा कला की, चित्रकूट में राम की।



भीमबैठका आदिकला का पत्थर पर अभिषेक है,
अमृत कुंड अमरकंटक में, ऐसा मध्यप्रदेश है।


क्षिप्रा में अमृत घट छलका मिला कृष्ण को ज्ञान यहां,
महाकाल को तिलक लगाने मिला हमें वरदान यहां।



कविता, न्याय, वीरता, गायन, सब कुछ यहां विषेश है,
ह्रदय देश का है यह, मैं इसका, मेरा मध्यप्रदेश है।


सुख का दाता सब का साथी शुभ का यह संदेश है,

माँ की गोद, पिता का आश्रय मेरा मध्यप्रदेश है।

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सोमवार, 30 मई 2022

नरवर जनपद पंचायत के वार्ड और उनमें सम्मिलित ग्राम पंचायतों की जानकारी तथा वार्डों का आरक्षण

जनपद पंचायत नरवर के वार्ड और उनके अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों की सूची तथा वार्डों के आरक्षण की स्थिति

(मध्यप्रदेश त्रि-स्तरीय पंचायत निर्वाचन की सम्पूर्ण जानकारी के साथ)

MP Panchayat Election 2022 : मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार दिनांक 27-05-2022 को पत्र क्रमांक एफ-37/PN-01/2022/तीन/211 द्वारा मध्य प्रदेश में त्रि-स्तरीय पंचायत निर्वाचन कराये जाने हेतु कार्यक्रम जारी कर दिया है। चुनाव कार्यक्रम जारी होने के साथ ही प्रदेश भर में आदर्श आचार संहिता लागू हो गयी है। निर्वाचन कार्यक्रम में उल्लिखित तिथियों के अनुसार -


सोमवार दिनांक 30-05-2022 से सोमवार दिनांक 06-06-2022 तक नामनिर्देशन पत्र जमा करना निर्धारित किया गया है। नामनिर्देशन पत्र (नामांकन फॉर्म) प्रातः 10.30 बजे से अपरान्ह 3.00 बजे तक जमा कराए जा सकते हैं।

मंगलवार दिनांक 07-06-2022 को अंतिम तिथि 06 जून तक जमा हुए नामांकन पत्रों की संवीक्षा यानि जाँच की जाएगी। जिसमें त्रुटिपूर्ण आवेदनों पर कार्यवाही करते हुए नामनिर्देशन पत्रों की छँटनी की जाएगी तथा अपूर्ण अथवा त्रुटिपूर्ण आवेदनों को निरस्त एवं निर्वाचन के नियमानुसार उपयुक्त नामनिर्देशन पत्रों को स्वीकृत करने की कार्यवाही की जाएगी।

शुक्रवार दिनांक 10-06-2022 को सांय 3.00 बजे तक नाम वापिसी की कार्यवाही की जाएगी। जिसमें अभ्यर्थिता से नाम वापिस लेने के इच्छुक प्रत्याशी निर्धारित प्रारूप आर ओ (रिटर्निंग ऑफिसर) के पास जमा कर नाम वापिस ले सकते हैं।

शुक्रवार दिनांक 10-06-2022 को ही नाम वापिसी के ठीक बाद यानि 3.00 बजे के बाद निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थियों (प्रत्याशियों) की फाईनल सूची तैयार की जाएगी तथा सूची तैयार होने के बाद निर्वाचन के नियमानुसार अभ्यर्थियों को चुनाव चिन्ह (प्रतीक चिह्न) आवंटित किये जाएँगे।

उपरोक्त सभी प्रक्रियाएँ पूर्ण होने के पश्चात बारी आती है सबसे महत्वपूर्ण तिथि की। जी हाँ, वह तारीख जिस दिन प्रत्याशियों की किस्मत मतपेटी में बन्द होगी। मतदान की तारीख चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण तारीख मानी जाती है। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव - 2022 के कार्यक्रम में सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में 3 चरणों में मतदान कराए जाने की तिथियाँ निर्धारित की हैं, जो इस प्रकार हैं -

प्रथम चरण मतदान - शनिवार दिनांक 25-06-2022
द्वितीय चरण मतदान - शुक्रवार दिनांक 01-07-2022
तृतीय चरण मतदान - शुक्रवार दिनांक 08-07-2022

मध्यप्रदेश निर्वाचन आयोग द्वारा मतदान का समय प्रातः 07 बजे से अपरान्ह 03.00 तक का निर्धारित किया गया है जो कि एक नया समय है। इससे पूर्व हुए मतदानों में यह समय सांंय 5 बजे तथा 6 बजे तक भी रहा है।

गुरुवार दिनांक 14-07-2022 को पंच, सरंपच तथा जनपद पंचायत सदस्य पद की मतगणना की जाएगी तथा फाईनल मतगणना होने के बाद निर्वाचन परिणाम घोषित किये जाएँगे। इसी तारीख को मतपेटियों में कैद सभी प्रत्याशियों की किस्मत खुलेगी और जीत हार का फैसला होगा।

यह तो हुई नामनिर्देशन पत्र जमा करने की तिथि से लेकर मतगणना और चुनाव परिणाम घोषित होने तक के कार्यक्रम की बात। अब बात करते हैं मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले की नरवर जनपद पंचायत के वार्डों के आरक्षण की स्थिति और वार्डों में सम्मिलित ग्राम पंचायतों के बारे में -

जनपद पंचायत नरवर में कुल 21 वार्ड हैं जिनमें नरवर तहसील की कुल 61 ग्राम पंचायतें समाहित हैं।

वार्ड क्रमांक 01 - जनपद पंचायत नरवर का वार्ड क्रमांक 01 अनारक्षित (मुक्त) है, यानि इस वार्ड से किसी भी वर्ग का महिला अथवा पुरुष अभ्यर्थी निर्वाचन हेतु नामनिर्देशन पत्र दाखिल कर सकता है। इस वार्ड में कुल तीन ग्राम पंचायतें बरखाडी, बीलोनी और साबोली शामिल हैं



वार्ड क्रमांक 02 - जनपद पंचायत नरवर का वार्ड क्रमांक 02 अनारक्षित (महिला) है, यानि इस वार्ड से किसी भी वर्ग से केवल महिला अभ्यर्थी निर्वाचन हेतु नामनिर्देशन पत्र दाखिल कर सकती हैं। इस वार्ड में कुल तीन ग्राम पंचायतें कठेंगरा, चकरामपुर और भीमपुर शामिल हैं

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वार्ड क्रमांक 03 - जनपद पंचायत नरवर का वार्ड क्रमांक 01 अनारक्षित (महिला) है, यानि इस वार्ड से किसी भी वर्ग से केवल महिला अभ्यर्थी निर्वाचन हेतु नामनिर्देशन पत्र दाखिल कर सकती हैं। इस वार्ड में कुल पाँच ग्राम पंचायतें कांकर, ख्यावदा, ठाटी, देवरीखुर्द और पीपलखाडी शामिल हैं

शुक्रवार, 16 जुलाई 2021

ग्वालियर से पुणे, अहमदाबाद और मुम्बई के लिए विमानन सेवाएँ शुरू | Flights from Gwalior to Pune Ahemdabad and Mumbai | Gwalior Flights

ग्वालियर से शुरू हुई नई विमानन सेवाएँ, अब कर सकेंगे पुणे, अहमदाबाद और मुम्बई का हवाई सफर

Team : Narwar Darshan


#GoodMorning with #GoodNews

ग्वालियर-पुणे
पुणे-ग्वालियर
जबलपुर- सूरत
सूरत- जबलपुर
ग्वालियर-अहमदाबाद
अहमदाबाद-ग्वालियर
ग्वालियर-मुम्बई
मुम्बई-ग्वालियर
रास्ता हुआ आसान नई उड़ानों की होगी शुरुआत
किस समय उड़ेगी उड़ान कब पहुंचेगी निर्धारित स्थान देखें तालिका 👇




#NarwarDarshan #BreakingNews #Gwalior #Flight #Pune #Jabalpur #Surat #ahmedabad #Mumbai #Maharashtra #Gujrat #MadhyaPradesh #JyotiradityaScindia

शुक्रवार, 29 जनवरी 2021

आखिर क्या है 3 नए कृषि कानूनों में विवाद की वजह? आसान भाषा में कृषि बिल


तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान प्रदर्शन कर रहे हैं. दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर किसान बीते कई हफ्ते से आंदोलित हैं और तीनों कृषि कानूनों के वापस लिए जाने की मांग कर रहे हैं. वर्तमान कृषि आंदोलन को एक विशेष राज्य और एक विशेष समूह तक सीमित बताया जा रहा है. यह बात सही भी है क्योंकि वर्तमान कृषि आंदोलन पंजाब और हरियाणा के किसानों के बीच अधिक दिख रहा है.


ऐसा इसलिए क्योंकि हमेशा से इस आर्थिक सोच को प्रभावी बनाना था कि कृषि एक लाभ का क्षेत्र नहीं है और कभी भी किसानों को एक बड़ी 'बारगेनिंग पावर' नहीं बनने देना था. आज यह सफल होता भी दिख रहा है. लेकिन, तीनों नए कृषि कानून सिर्फ किसानों के नजरिए से विरोध का कारण नहीं हैं बल्कि यह सामान्य जन के लिए भी निकट भविष्य में चुनौती का कारण बन सकते हैं.


इसका एक ठोस कारण यह भी है कि इन तीनों कृषि कानूनों का सबसे अधिक प्रभाव पंजाब और हरियाणा में ही रहने वाला है. पंजाब और हरियाणा में देश की सबसे अधिक कृषि मंडियां हैं और वहां के किसान मंडियों के जरिये एमएसपी के लाभ को जानते हैं. बाकी देश के अन्य हिस्से जिनमें प्रमुख रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों को कृषि की मूलभूत जरूरतों और कृषि मंडियों से दूर रखा गया.


पहला कानून जिसका नाम 'कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020' है, यह कानून निकट भविष्य में सरकारी कृषि मंडियों की प्रासंगिकता को शून्य कर देगा. सरकार निजी क्षेत्र को बिना किसी पंजीकरण और बिना किसी जवाबदेही के कृषि उपज के क्रय-विक्रय की खुली छूट दे रही है. इस कानून की आड़ में सरकार निकट भविष्य में खुद बहुत अधिक अनाज न खरीदने की योजना पर काम कर रही है. सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक कृषि उपज की खरीदारी निजी क्षेत्र करें ताकि वह अपने भंडारण और वितरण की जवाबदेही से बच सके.
सोचिए कि अगर निकट भविष्य में कभी कोरोना जैसी विषम परिस्थिति का सामना करना पड़ा तो उस दौरान सरकार खुद लोगों को बुनियादी खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए निजी क्षेत्र से खरीदारी करेगी. वहीं, आज वह इसे अपने बड़े एफसीआई गोदामों से लोगों को मुफ्त में उपलब्ध करा रही है.
साथ ही सरकारी कृषि मंडियों के समानांतर आसान शर्तों पर खड़ा किया जाने वाला नया बाजार इनकी प्रासंगिकता को खत्म कर देगा और जैसे ही सरकारी मंडियों की प्रासंगिकता खत्म होगी, ठीक उसी के साथ एमएसपी का सिद्धांत भी प्रभावहीन हो जाएगा क्योंकि मंडियां एमएसपी को सुनिश्चित करती हैं.


दूसरा कानून 'कृषि (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत अश्वासन और कृषि सेवा करार विधेयक, 2020' है, जिसकी अधिक चर्चा कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के विवाद में समाधान के मौजूदा प्रावधानों के संदर्भ में की जा रही है.
इस कानून का पूरा विरोध इस तथ्य पर हो रहा है कि इसके जरिए किसानों को विवाद की स्थिति में सिविल कोर्ट जाने से रोका गया है. यह बिल्कुल ठीक विरोध है. लेकिन, इसके साथ ही साथ एक और हिस्सा है जहां ध्यान देने की जरूरत है. कांट्रैक्ट फार्मिंग के इस कानून की वजह से देश में भूमिहीन किसानों के एक बहुत बड़े वर्ग के जीवन पर गहरा संकट आने वाला है.


2011 की जनगणना के अनुसार, देश में कुल 26.3 करोड़ परिवार खेती-किसानी के कार्य में लगे हुए हैं. इसमें से महज 11.9 करोड़ किसानों के पास खुद की जमीन है. जबकि 14.43 करोड़ किसान भूमिहीन हैं. भूमिहीन किसानों की एक बड़ी संख्या 'बंटाई' पर खेती करती है.
भूमि के मालिक से कुल पैदावार की आधी फसल पर बंटाई बोई जाती है. ग्रामीण इलाकों का यह अपना एक प्रचलित खेती करने का तरीका है. इस नए कानून के जरिए पूंजीपतियों को कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के लिए खुली छूट दी जा रही है. अब सोचने का विषय यह है कि गांव का कोई भूमिहीन किसान इन बड़े निजी क्षेत्र की फर्म से मुकाबला कैसे करेगा?


एक बड़ी कंपनी बड़ी आसानी से किसी किसान से उसकी भूमि 5 साल की अवधि के लिए एकमुश्त एडवांस पर ले सकती है. लेकिन, गांव का एक भूमिहीन किसान यह करने में असमर्थ रहेगा. ऊपर से भारत के किसानों का एक बड़ा हिस्सा अशिक्षित है जो कि कानूनी अनुबंध करने में खुद को असहज पाएगा. ऐसी परिस्थिति में भूमिहीन किसानों का पूरा जीवन खत्म हो जाएगा.

ऊपर से बड़ी कंपनियां मशीनों के जरिए खेती का कार्य करेंगी न कि मजदूरों के जरिए. इसलिए बहुत अधिक रोजगार भी उत्पन्न नहीं होने जा रहे हैं. यह कानून देश के 14 करोड़ भूमिहीन किसानों के भविष्य को प्रभावित करने जा रहा है.

तीसरा कानून 'आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक, 2020' है. यह कानून आने वाले निकट भविष्य में खाद्य पदार्थों की महंगाई का दस्तावेज है. इस कानून के जरिए निजी क्षेत्र को असीमित भंडारण की छूट दी जा रही है. उपज जमा करने के लिए निजी निवेश को छूट होगी.
सरकार को पता नहीं चलेगा कि किसके पास कितना स्टॉक है और कहां है? यह जमाखोरी और कालाबाजारी को कानूनी मान्यता देने जैसा है. वहीं, इस कानून में स्पष्ट लिखा है कि राज्य सरकारें असीमित भंडारण के प्रति तभी कार्यवाही कर सकती हैं जब वस्तुओं की मूल्यवृद्धि बाजार में दोगुनी होगी. एक तरह से देखें तो यह कानून महंगाई बढ़ाने की भी खुली छूट दे रहा है. विपरीत हो चुकी आर्थिक स्थिति के बीच यह कानून देश के मध्य आय वर्ग एवं निम्न आय वर्ग की बुनियाद को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाने वाला है.

समय रहते सरकार को चाहिए कि इन तीनों कानूनों का उचित हल निकाल लिया जाए. वजह है कि यह आंदोलन भूमिहीन किसानों के रास्ते होते हुए मध्य एवं निम्न आय वर्ग को भी जोड़ेगा. आने वाले भविष्य में जब ये दोनों वर्ग भी खुद को इन कानूनों के जरिए ठगा महसूस करेंगे तो आंदोलन की रफ्तार और तेज हो जाएगी.
तीनों ही कृषि कानून किसानों और आम लोगों को बहुत फायदा पहुंचाने नहीं जा रहे हैं. न तो कोई सामान्य किसान इतना आर्थिक समृद्ध है कि वह बड़े गोदाम बनाकर अपनी फसलों का भंडारण करेगा और न ही भूमिहीन किसान इतने मजबूत हैं कि वे एक लंबी अवधि के लिए खेतों का कानूनी अनुबंध कर पाएंगे. तो फिर ये सब कौन कर सकेगा? उत्तर है पूंजी से भरे पड़े लोग.

विक्रांत निर्मला सिंह
संस्थापक एवं अध्यक्ष,
फाइनेंस एंंड इकनॉमिक थिंक काउसिंल,
काशी हिंदू विश्वविद्यालय

साभार : इकोनॉमिक्सटाइम्स.कॉम