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मंगलवार, 24 दिसंबर 2024

मध्यप्रदेश के 10 पर्यटक स्थल, जहाँ आप आसानी से घूमने जा सकते हैं। देखें पूरी डिटेल्स।

मध्यप्रदेश: भारत का हृदय और 10 अद्वितीय पर्यटक स्थल


मध्यप्रदेश, जिसे भारत का हृदय प्रदेश भी कहा जाता है, अपने ऐतिहासिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध है। यहां के अद्वितीय पर्यटक स्थल आपको भारत की समृद्ध विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य की झलक दिखाते हैं। आइए जानते हैं मध्यप्रदेश के 10 प्रमुख पर्यटक स्थलों के बारे में विस्तार से:

1. नरवर किला

नरवर किला शिवपुरी जिले में स्थित है और इसका ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व बहुत अधिक है। यह किला प्राचीन भारतीय योद्धाओं और राजाओं की वीरता का प्रतीक है। किले के अंदर विभिन्न मंदिर, महल और जलाशय हैं, जो इसके गौरवशाली अतीत की कहानी बयां करते हैं।
नरवर के प्राचीन किले का एरियल व्यू

  • कैसे पहुँचें:
    • नजदीकी रेलवे स्टेशन: शिवपुरी रेलवे स्टेशन (लगभग 42 किमी)

    • सड़क मार्ग: नरवर तक सड़क मार्ग द्वारा ग्वालियर और शिवपुरी से आसानी से पहुंचा जा सकता है।


    2. खजुराहो
    खजुराहो अपने अद्भुत और सुन्दर मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है, जो यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं। यहाँ के मंदिर अपनी उत्कृष्ट शिल्पकला और कामुक मूर्तियों के लिए विख्यात हैं। खासकर कंदारिया महादेव मंदिर और लक्ष्मण मंदिर दर्शनीहैं।


  • कैसे पहुँचें:

    • नजदीकी रेलवे स्टेशन: खजुराहो रेलवे स्टेशन

    • सड़क मार्ग: खजुराहो तक सड़क मार्ग द्वारा छतरपुर और सतना से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

  • 3. सांची
    सांची का स्तूप, जिसे मौर्य सम्राट अशोक ने बनवाया था, बौद्ध धर्म का एक प्रमुख केन्द्र है। यहां की अद्भुत वास्तुकला और इतिहास प्रेमियों के लिए यह स्थान एक स्वर्ग के समान है। स्तूप के तोरण द्वार और शिलालेख इसकी खासियत हैं।


  • कैसे पहुँचें:

    • नजदीकी रेलवे स्टेशन: सांची रेलवे स्टेशन

    • सड़क मार्ग: भोपाल से सांची तक सड़क मार्ग द्वारा लगभग 46 किमी की दूरी पर।

  • 4. पचमढ़ी
    मध्यप्रदेश का इकलौता हिल स्टेशन पचमढ़ी अपने हरियाली, झरनों और गुफाओं के लिए प्रसिद्ध है। सतपुड़ा की रानी कहलाने वाला यह स्थान शांत वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य का अनोखा अनुभव प्रदान करता है।


  • कैसे पहुँचें:

    • नजदीकी रेलवे स्टेशन: पिपरिया रेलवे स्टेशन (लगभग 50 किमी)

    • सड़क मार्ग: भोपाल और नागपुर से पचमढ़ी तक सीधी बस या टैक्सी उपलब्ध है।

  • 5. भेड़ाघाट
    भेड़ाघाट, जबलपुर के पास स्थित, अपनी संगमरमर की चट्टानों और धुआंधार जलप्रपात के लिए प्रसिद्ध है। यहां की चट्टानों के बीच नाव की सवारी करना अद्भुत अनुभव प्रदान करता है। रात्रिकालीन चांदनी में यह स्थान और भी रमणीय लगता है।


  • कैसे पहुँचें:

    • नजदीकी रेलवे स्टेशन: जबलपुर रेलवे स्टेशन (लगभग 25 किमी)

    • सड़क मार्ग: जबलपुर से भेड़ाघाट तक टैक्सी और बस द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।

  • 6. उज्जैन
    उज्जैन, महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का निवास स्थान है और यह शहर भारत के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। यहां कुंभ मेले का आयोजन होता है और कालिदास के महाकाव्य "मेघदूत" से इसका गहरा संबंध है।


  • कैसे पहुँचें:

    • नजदीकी रेलवे स्टेशन: उज्जैन जंक्शन

    • सड़क मार्ग: इंदौर और भोपाल से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।

  • 7. ग्वालियर
    ग्वालियर अपने ऐतिहासिक किले और संगीत प्रेमियों के लिए प्रसिद्ध है। ग्वालियर किला, जिसे "भारत का जिब्राल्टर" कहा जाता है, अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा, तानसेन का मकबरा संगीत प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण है।


  • कैसे पहुँचें:

    • नजदीकी रेलवे स्टेशन: ग्वालियर जंक्शन

    • सड़क मार्ग: दिल्ली और आगरा से सड़क मार्ग द्वारा ग्वालियर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

  • 8. ओरछा
    ओरछा, बेतवा नदी के किनारे स्थित, अपने महलों और मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। यहां का राजमहल, जहांगीर महल और राम राजा मंदिर प्रमुख आकर्षण हैं। यह स्थान इतिहास और स्थापत्य कला प्रेमियों के लिए आदर्श है।


  • कैसे पहुँचें:

    • नजदीकी रेलवे स्टेशन: झांसी रेलवे स्टेशन (लगभग 16 किमी)

    • सड़क मार्ग: झांसी से ओरछा तक टैक्सी या बस द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।

  • 9. कान्हा राष्ट्रीय उद्यान
    कान्हा राष्ट्रीय उद्यान भारत के सबसे सुंदर और व्यवस्थित राष्ट्रीय उद्यानों में से एक है। यह स्थान बाघ, बारहसिंघा और अन्य वन्य जीवों को देखने के लिए आदर्श है। रुडयार्ड किपलिंग की "जंगल बुक" की प्रेरणा भी यहीं से ली गई थी।


  • कैसे पहुँचें:

    • नजदीकी रेलवे स्टेशन: जबलपुर रेलवे स्टेशन (लगभग 165 किमी)

    • सड़क मार्ग: जबलपुर और मंडला से कान्हा तक सीधी बसें और टैक्सियां उपलब्ध हैं।

  • 10. मांडू
    मांडू, अपने रोमांटिक इतिहास और अद्वितीय स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है। यहां का जहाज महल, हिंडोला महल और रानी रूपमती महल देखने लायक हैं। मानसून के दौरान मांडू का सौंदर्य और भी निखर जाता है।


  • कैसे पहुँचें:

    • नजदीकी रेलवे स्टेशन: रतलाम रेलवे स्टेशन (लगभग 124 किमी)

    • सड़क मार्ग: इंदौर और धार से मांडू तक सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।

  • 11. भीमबेटका
    भीमबेटका की गुफाएं, यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल हैं और यह स्थान प्रागैतिहासिक समय की चित्रकला के लिए प्रसिद्ध है। यहां की गुफाएं प्राचीन मानव जीवन और उनकी कला का अद्भुत प्रमाण हैं।


  • कैसे पहुँचें:

    • नजदीकी रेलवे स्टेशन: भोपाल रेलवे स्टेशन (लगभग 45 किमी)

    • सड़क मार्ग: भोपाल से भीमबेटका तक सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।

  • निष्कर्ष
    मध्यप्रदेश में ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों का एक अद्वितीय मिश्रण है। यहां का प्रत्येक स्थान अपने आप में अनूठा और दर्शनीय है। यदि आप इतिहास, संस्कृति और प्रकृति के प्रेमी हैं, तो मध्यप्रदेश आपकी यात्रा सूची में अवश्य होना चाहिए।
    अधिक जानकारी के लिए और किसी स्थान की यात्रा की प्लानिंग व होटल / लॉज / टिकट / कैब-कार इत्यादि की बुकिंग के लिए @NarwarDarshan से +918819959618 | +919589756284 पर सम्पर्क करें।

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    शुक्रवार, 7 जून 2024

    ग्वालियर से नरवर की दूरी, दिशा, किराया और आवागमन के लिए उपलब्ध साधनों की सम्पूर्ण जानकारी

    ग्वालियर से नरवर किस ओर है? ग्वालियर से नरवर कैसे पहुँचें, इसकी पूरी जानकारी इस लेख में दी गयी है।
    टीम नरवर दर्शन - यात्रा

    श्री लोढीमाता की पवित्र पावन भूमि नरवर मध्यप्रदेश के ग्वालियर संभाग अंतर्गत आने वाले शिवपुरी जिले में स्थित है। राजा नल-दमयंती की ऐतिहासिक नगरी नरवर का उल्लेख महाभारतकाल में नलपुर के नाम से मिलता है। नरवर अपने इतिहास, विरासत, प्रकृति और लोढीमाता के चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ प्राचीन नरवर किला, श्री लोढीमाता मंदिर, श्री टपकेश्वर महादेव, मडीखेडा बाँध, मोहनी सागर बाँध तथा ग्वालियर जिले में नरवर की सीमा से लगा हुआ हरसी बाँध जैसे बडे-बाँध तीर्थ स्थल और पर्यटक स्थल के रूप में विद्यमान हैं। इसके अलावा नरवर में अनेक झील, झरने, तालाब और सिंध नदी का रमणीक तट भी मनमोहक है।

    मैंने बीते दिनों ब्लॉग पर Google Analytics में देखा कि नरवर के लिए ग्वालियर से आने के बारे में लोगों ने Google Search किया है। इसलिए मुझे लगा कि इस पर एक सरल और संक्षिप्त लेख होना चाहिए। तो आज इस लेख में ग्वालियर से नरवर कैसे पहुँचें, इसी विषय पर पूरी जानकारी देने का प्रयास किया है। आप से अनुरोध है कि यदि आप भी एक पर्यटक के रूप में अथवा श्री लोढीमाता पर श्रद्धालु के रूप में नरवर आने के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह लेख अवश्य पढें।

    (लेख निरंतर अपडेट किया जा रहा है ...)

    सोमवार, 29 अगस्त 2022

    नरवर किले के लिए पीछे सुल्तानपुर की ओर से बनेगा रोड़, किले पर ऊपर पहुँचेंगे वाहन

    नरवर किले के लिए सबसे बडे और बहुत प्रतीक्षित प्रोजेक्ट का कार्य शीघ्र होगा प्रारंभ

    टीम नरवर दर्शन : Team Narwar Darshan
    नरवर किले के पार्श्व भाग का अवलोकन करते अधिकारीगण एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि

    नरवर. शिवपुरी से पहले नरवर जिला हुआ करता था। नरवर का प्राचीन किला अनेक ऐतिहासिक घटनाओं को समेटे हुए है। इस किले पर पहुँचने के लिए कोई व्यवस्थित मार्ग नहीं बन पा रहा था, लेकिन अब इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी गयी है जिसके तहत किले के पीछे से सुल्तानपुर होकर रास्ता बनाया जाएगा।


    नरवर को पर्यटन की दिशा में एक नई पहचान और नए आयाम स्थापित करने हेतु कई सालों से प्रयास चलते आ रहे हैं। जिसमें नरवर दुर्ग पर ऊपर के लिए पहुँच मार्ग बनाना सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण कार्य है। पूर्व में आगे की ओर से किले पर प्रवेश हेतु मार्ग बनाने के प्रयास किए गए, जो कि निर्माण की दृष्टि से अनुकूल न होने के कारण अधर में अटक कर रह गया। इस प्रकार कुछ न कुछ अटकलों की वजह से इसमें बाधाएं आती रहीं और यह पूर्ण ना हो सका। अब किले पर पहुँच मार्ग पीछे ग्राम सुल्तानपुर की ओर से बनाया जाएगा। जिस हेतु सभी आवश्यक तैयारियां एव मौका स्थल का मुआयना सक्षम अधिकारियों द्वारा किया गया है।
    उल्लेखनीय है कि नवीन परिषद गठन के बाद से नवगठित नगर परिषद नरवर अध्यक्ष श्रीमती पदमा-संदीप माहेश्वरी द्वारा इस हेतु विशेष रुचि लेकर उच्च स्तरीय प्रयास किए जिसमें बीजेपी प्रदेश कार्यकारी समिति सदस्य संदीप माहेश्वरी एवं केबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त मध्यप्रदेश कुक्कुट एवं पशुधन विकास निगम अध्यक्ष व पूर्व विधायक करैरा श्री जसमन्त जाटव जी का विशेष सहयोग रहा। जिन्होंने किले पर ऊपर पहुँचने हेतु सड़क निर्माण के संबंध में केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया जी एवं लोकनिर्माण विभाग मंत्री मध्यप्रदेश श्री गोपाल भार्गव जी, लोकनिर्माण विभाग राज्यमंत्री श्री सुरेश राठखेड़ा जी को अवगत कराया तथा, इस प्रोजेक्ट हेतु राशि स्वीकृत कराने हेतु समय-समय पर पत्राचार किया। जिसके क्रम में कार्यवाही करते हुए लोकनिर्माण विभाग के प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा रविवार दिनांक 28-08-2022 को मौके का स्थल निरीक्षण किया गया। जानकारी के अनुसार अब किले पर प्रवेश हेतु सड़क निर्माण पीछे की ओर से किया जाएगा, क्योंकि वहाँ से सुगमता से मार्ग बनाया जा सकता है, जो कि निर्माण के अनुकूल है। तथा पिछले प्रोजेक्ट की शेष राशि से किले के अग्रभाग में अधूरे पड़े कार्य को पेवरब्लॉक्स लगाकर पूर्ण किया जाएगा।


    स्मरण रहे कि नरवर राजा नल-दमयंती की प्राचीन नगरी है, जिसका उल्लेख महाभारत के वनपर्व में आता है। श्रीहर्ष रचित विश्व प्रसिद्ध संस्कृति ग्रन्थ नैषिधीयचरितम में नरवर को प्राचीन निषध देश बतलाया गया है, जो बाद में नलपुल नाम से जाना गया और वर्तमान में नरवर नाम से जाना जाता है। इस अवसर पर श्रीमती माहेश्वरी ने कहा कि हमें नरवर को न केवल प्रदेश में, बल्कि देश में सबसे स्वच्छ, सुन्दर और आकर्षक नगर बनाना है। पर्यटन की अपार संभावनाएं हमारे नरवर में मौजूद हैं, जिन पर काम करते हुए नगर में लोगों को न केवल रोजगार उपलब्ध होगा, बल्कि उनके जीवन स्तर में भी सुधार होगा। नरवर को पर्यटन पटल पर अपेक्षित स्थान दिलाने हेतु हमारे प्रयास सदैव जारी रहेंगे। उन्होंने स्थानीय नागरिकों से शहर की बेहतरी में सहयोग हेतु आग्रह भी किया।

    इस मौके पर विशेष रूप से बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति सदस्य संदीप माहेश्वरी, करैरा जनपद अध्यक्ष पुष्पेन्द्र-जसमन्त जाटव, नप नरवर उपाध्यक्ष बिजेंद्र सिंह गुर्जर, पूर्व नप अध्यक्ष एवं इतिहासकार डॉ. मनोज माहेश्वरी, पूर्व नप उपाध्यक्ष एवं वर्तमान परिषद में पार्षद राकेश सोनी, सांसद प्रतिनिधि फिरोज़ खान, नप पार्षद मुलायम सिंह कुशवाह, युवा भाजपा नेता रोहित मिश्रा मगरौनी तथा स्थानीय प्रशासन जिसमें PWD SDO हरिओम अग्रवाल, PWD के एग्जेक्युटिव इंजीनियर, नवागत तहसीलदार नरवर विजय कुमार शर्मा एवं संबंधित हलका पटवारी समेत अन्य कर्मचारी तथा स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।


    आपस में विमर्श-चर्चा करते नरवर केे स्थानीय जनप्रतिनिधिगण


    नरवर दर्शन
    (भारतीय इतिहास, विरासत, पर्यटन, प्रकृति, शिक्षा, साहित्य, कला और संस्कृति का संवाहक)


    शुक्रवार, 16 जुलाई 2021

    ग्वालियर से पुणे, अहमदाबाद और मुम्बई के लिए विमानन सेवाएँ शुरू | Flights from Gwalior to Pune Ahemdabad and Mumbai | Gwalior Flights

    ग्वालियर से शुरू हुई नई विमानन सेवाएँ, अब कर सकेंगे पुणे, अहमदाबाद और मुम्बई का हवाई सफर

    Team : Narwar Darshan


    #GoodMorning with #GoodNews

    ग्वालियर-पुणे
    पुणे-ग्वालियर
    जबलपुर- सूरत
    सूरत- जबलपुर
    ग्वालियर-अहमदाबाद
    अहमदाबाद-ग्वालियर
    ग्वालियर-मुम्बई
    मुम्बई-ग्वालियर
    रास्ता हुआ आसान नई उड़ानों की होगी शुरुआत
    किस समय उड़ेगी उड़ान कब पहुंचेगी निर्धारित स्थान देखें तालिका 👇




    #NarwarDarshan #BreakingNews #Gwalior #Flight #Pune #Jabalpur #Surat #ahmedabad #Mumbai #Maharashtra #Gujrat #MadhyaPradesh #JyotiradityaScindia

    गुरुवार, 17 अगस्त 2017

    कैसे पहुँचें राजा नल दमयंती की राजधानी प्राचीन नरवर तक

    चले आईए कि रस्ते तैयार हैं ... 

    विध्यांचल की घनी पहाडियों में बसा नरवर. सिंध की गोद में हँसता खेलता नरवर. नल-दमयंती और ढोला-मारू के जैसी प्रेम कथाओं से महकता नरवर. नरवर  एक शहर, एक इतिहास, अनेक गाथाएँ ... बहुत कुछ। ❤️


    नरवर आना इतना आसान है, कि आप आ ही जाएँगे। पूछते तलाशते, घूमते फिरते। कैसे भी करके।


    यहाँ नरवर पहुँचने के कुछ आसान रास्तों के बारे में बताया गया है। इसमें गूगल मैप का रूट लिंक भी शामिल है, जिसपर क्लिक करते ही आपको मुख्य स्थानों से नरवर का रूट / रास्ता दूरी सहित पता चल जाएगा।

    Train / Bus / Air Route

    ग्वालियर की ओर से आना


    ग्वालियर से नरवर की कुल दूरी लगभग 100 किमी है। मान लीजिए आप ग्वालियर आ पहुँचे हैं। ग्वालियर तो महानगर है सो देश के सभी बडे शहरों से रेलमार्ग से जुडा है। ग्वालियर में एयरपोर्ट भी है जहाँ से देश के कई बडे शहरों से घरेलू एयरलाइंस नियमित उड़ान भरती हैं। आप अब ग्वालियर से नरवर के लिए चल दीजिए ... वहाँ से NH3 राष्ट्रीय राजमार्ग (यही आगरा-मुम्बई हाईवे है) दक्षिण की ओर आता है। यहाँ से आप घाटीगाँव से थोड़ा आगे चलकर रानीघाटी मार्ग पकड़ सकते हैं, जो आपको घने जंगलों से होते हुए सीधे नरवर पहुँचा देगा। लेकिन सलाह यह है कि ये मार्ग सुरक्षित नहीं है। यदि आप एडवेंचर प्रेमी है तो यह रास्ता आपके लिए रोमांचकारी हो सकता है। 
    इसके अलावा आप उसी एनएच3 से होते हुए शिवपुरी से पहले ही सतनवाड़ा पर रुककर राईट हैंड पर टर्न लेंगे तो आप नरवर-शिवपुरी रोड पर होंगे। करीब 50 मिनट की दूरी तय कर आप नरवर पहुँच जाएँगे।
     ये रहा गूगल मार्गदर्शक ... आपकी मदद के लिए -

    झाँसी की ओर से आना

    झांसी से नरवर की दूरी लगभग 90 किमी है। ग्वालियर की तरह ही झाँसी भी सभी बडे शहरों से रेलमार्ग से जुडा है। झाँसी से नरवर आने के लिए आप बस या निजी वाहन से करैरा होते हुए नरवर पहुँच सकते हैं।

    जिला मुख्यालय शिवपुरी की ओर से

    शिवपुरी नरवर का जिला मुख्यालय है। यहाँ से नरवर मात्र 45 कि.मी. है। आप निजी वाहन या यात्री बस के माध्यम से सतनवाडा होते हुए और घने जंगल, नदी, डेम आदि का लत्फ उठाते हुए नरवर पहुँच सकते हैं।

    और ये रहा शिवपुरी से नरवर का मार्ग (क्लिक करिए)

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