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रविवार, 24 मई 2026

MP Atithi Shikshak 2026-27: अतिथि शिक्षकों के लिए बड़ी खुशखबरी! प्रोफाइल अपडेट, अनुभव क्लेम और डबल आईडी मर्ज की प्रक्रिया शुरू, जानें आखिरी तारीख!

नमस्कार दोस्तों, 'नरवर दर्शन' (Narwar Darshan) ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

​मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में अतिथि शिक्षक (Guest Teacher) के रूप में कार्य कर रहे और भविष्य में कार्य करने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) की ओर से एक बेहद महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए GFMS (Guest Faculty Management System) पोर्टल को एक बार फिर से एक्टिव कर दिया गया है।

​यदि आप भी इस सत्र में अपनी सेवाएं देना चाहते हैं, तो विभाग द्वारा जारी की गई नई गाइडलाइंस और महत्वपूर्ण तारीखों को बिल्कुल भी मिस न करें। आइए जानते हैं इस बार पोर्टल पर क्या-क्या नए बदलाव और सुविधाएं दी गई हैं।

​📅 सबसे महत्वपूर्ण तारीख: समय बहुत कम है!

​विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, पोर्टल पर सभी जरूरी प्रक्रियाएं 22 मई 2026 से शुरू हो चुकी हैं और इसकी अंतिम तिथि 28 मई 2026 निर्धारित की गई है। समय सीमा बहुत कम है, इसलिए अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना अपनी प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी कर लें।

​🛠️ पोर्टल पर क्या-क्या काम होने हैं? (मुख्य बिंदु)

​इस बार पोर्टल पर उम्मीदवारों की सहूलियत के लिए कई बड़े विकल्प दिए गए हैं:

  1. प्रोफाइल अपडेट (Profile Update): यदि आपकी शैक्षणिक योग्यता (Qualification) में कोई बढ़ोतरी हुई है (जैसे आपने हाल ही में B.Ed, M.A. या कोई अन्य डिग्री पूरी की है), तो आप उसे अपनी प्रोफाइल में अपडेट कर सकते हैं।
  2. प्रोफाइल लॉक (Profile Lock): सभी जानकारियों को सही-सही भरने के बाद अपनी प्रोफाइल को लॉक करना अनिवार्य है। बिना लॉक किए आपकी प्रोफाइल आगे की प्रक्रिया के लिए मान्य नहीं होगी।
  3. नया पंजीयन और सत्यापन (Registration & Verification): नए आवेदक पोर्टल पर नया रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं और पुराने आवेदक अपनी जानकारी को सत्यापित कर सकते हैं।
  4. अनुभव क्लेम अपडेट (Experience Claim Update): पिछले सत्रों में किए गए कार्य का अनुभव प्रमाण पत्र (Experience Certificate) पोर्टल पर क्लेम करने का यह आखिरी मौका है, जिससे आपको मेरिट में प्राथमिकता मिल सके।
  5. डबल आईडी मर्ज सुविधा (Double ID Merge Facility - विशेष): इस बार विभाग ने उन अतिथि शिक्षकों को बड़ी राहत दी है जिनकी तकनीकी कारणों से या अलग-अलग समय पर दो यूजर आईडी बन गई थीं। अब आप 'डबल आईडी मर्ज सुविधा' का उपयोग करके दोनों आईडी को एक साथ जोड़ सकते हैं ताकि आपका अनुभव और डाटा सुरक्षित रहे।

​🧑‍🏫 संकुल प्राचार्य से सत्यापन (Verification) है अनिवार्य!

​पोर्टल पर ऑनलाइन फॉर्म भरने, प्रोफाइल अपडेट करने या अनुभव क्लेम दर्ज करने के बाद आपकी प्रक्रिया पूरी नहीं होती है।

  • ​ऑनलाइन पावती (Receipt) का प्रिंट आउट लेकर आपको अपने नजदीकी संकुल प्राचार्य (Sankul Principal) के पास जाना होगा।
  • ​वहां अपने सभी मूल दस्तावेजों (Original Documents) का मिलान करवाकर सत्यापन (Verification) अवश्य कराएं।
  • ​जब तक संकुल प्राचार्य अपनी आईडी से आपकी प्रोफाइल को वेरिफाई नहीं करेंगे, तब तक आपका आवेदन सत्र 2026-27 की भर्ती प्रक्रिया के लिए पात्र नहीं माना जाएगा।

​💡 आवेदकों के लिए 'नरवर दर्शन' की सलाह:

  • ​फॉर्म भरते समय अपने मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी को चालू स्थिति में रखें।
  • ​डबल आईडी मर्ज करते समय सावधानी बरतें और केवल अपनी ही वैध आईडी को मर्ज करें।
  • ​संकुल में सत्यापन कराते समय प्राचार्य द्वारा दी जाने वाली सत्यापित पावती को संभालकर रखें।

मध्यप्रदेश शिक्षा विभाग और अतिथि शिक्षकों से जुड़ी ऐसी ही हर छोटी-बड़ी ताज़ा खबरों और सटीक अपडेट्स के लिए हमारे ब्लॉग 'नरवर दर्शन' को सब्सक्राइब करना न भूलें। इस जानकारी को अपने साथी शिक्षकों के साथ व्हाट्सएप पर ज़रूर शेयर करें!

(नोट: अधिक तकनीकी जानकारी या किसी भी समस्या के समाधान के लिए उम्मीदवार आधिकारिक GFMS पोर्टल पर जा सकते हैं या अपने संकुल केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।)


#मध्यप्रदेश #अतिथिशिक्षक #शिक्षाविभाग

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शुक्रवार, 7 जून 2024

ग्वालियर से नरवर की दूरी, दिशा, किराया और आवागमन के लिए उपलब्ध साधनों की सम्पूर्ण जानकारी

ग्वालियर से नरवर किस ओर है? ग्वालियर से नरवर कैसे पहुँचें, इसकी पूरी जानकारी इस लेख में दी गयी है।
टीम नरवर दर्शन - यात्रा

श्री लोढीमाता की पवित्र पावन भूमि नरवर मध्यप्रदेश के ग्वालियर संभाग अंतर्गत आने वाले शिवपुरी जिले में स्थित है। राजा नल-दमयंती की ऐतिहासिक नगरी नरवर का उल्लेख महाभारतकाल में नलपुर के नाम से मिलता है। नरवर अपने इतिहास, विरासत, प्रकृति और लोढीमाता के चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ प्राचीन नरवर किला, श्री लोढीमाता मंदिर, श्री टपकेश्वर महादेव, मडीखेडा बाँध, मोहनी सागर बाँध तथा ग्वालियर जिले में नरवर की सीमा से लगा हुआ हरसी बाँध जैसे बडे-बाँध तीर्थ स्थल और पर्यटक स्थल के रूप में विद्यमान हैं। इसके अलावा नरवर में अनेक झील, झरने, तालाब और सिंध नदी का रमणीक तट भी मनमोहक है।

मैंने बीते दिनों ब्लॉग पर Google Analytics में देखा कि नरवर के लिए ग्वालियर से आने के बारे में लोगों ने Google Search किया है। इसलिए मुझे लगा कि इस पर एक सरल और संक्षिप्त लेख होना चाहिए। तो आज इस लेख में ग्वालियर से नरवर कैसे पहुँचें, इसी विषय पर पूरी जानकारी देने का प्रयास किया है। आप से अनुरोध है कि यदि आप भी एक पर्यटक के रूप में अथवा श्री लोढीमाता पर श्रद्धालु के रूप में नरवर आने के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह लेख अवश्य पढें।

(लेख निरंतर अपडेट किया जा रहा है ...)

सोमवार, 29 अगस्त 2022

नरवर किले के लिए पीछे सुल्तानपुर की ओर से बनेगा रोड़, किले पर ऊपर पहुँचेंगे वाहन

नरवर किले के लिए सबसे बडे और बहुत प्रतीक्षित प्रोजेक्ट का कार्य शीघ्र होगा प्रारंभ

टीम नरवर दर्शन : Team Narwar Darshan
नरवर किले के पार्श्व भाग का अवलोकन करते अधिकारीगण एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि

नरवर. शिवपुरी से पहले नरवर जिला हुआ करता था। नरवर का प्राचीन किला अनेक ऐतिहासिक घटनाओं को समेटे हुए है। इस किले पर पहुँचने के लिए कोई व्यवस्थित मार्ग नहीं बन पा रहा था, लेकिन अब इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी गयी है जिसके तहत किले के पीछे से सुल्तानपुर होकर रास्ता बनाया जाएगा।


नरवर को पर्यटन की दिशा में एक नई पहचान और नए आयाम स्थापित करने हेतु कई सालों से प्रयास चलते आ रहे हैं। जिसमें नरवर दुर्ग पर ऊपर के लिए पहुँच मार्ग बनाना सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण कार्य है। पूर्व में आगे की ओर से किले पर प्रवेश हेतु मार्ग बनाने के प्रयास किए गए, जो कि निर्माण की दृष्टि से अनुकूल न होने के कारण अधर में अटक कर रह गया। इस प्रकार कुछ न कुछ अटकलों की वजह से इसमें बाधाएं आती रहीं और यह पूर्ण ना हो सका। अब किले पर पहुँच मार्ग पीछे ग्राम सुल्तानपुर की ओर से बनाया जाएगा। जिस हेतु सभी आवश्यक तैयारियां एव मौका स्थल का मुआयना सक्षम अधिकारियों द्वारा किया गया है।
उल्लेखनीय है कि नवीन परिषद गठन के बाद से नवगठित नगर परिषद नरवर अध्यक्ष श्रीमती पदमा-संदीप माहेश्वरी द्वारा इस हेतु विशेष रुचि लेकर उच्च स्तरीय प्रयास किए जिसमें बीजेपी प्रदेश कार्यकारी समिति सदस्य संदीप माहेश्वरी एवं केबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त मध्यप्रदेश कुक्कुट एवं पशुधन विकास निगम अध्यक्ष व पूर्व विधायक करैरा श्री जसमन्त जाटव जी का विशेष सहयोग रहा। जिन्होंने किले पर ऊपर पहुँचने हेतु सड़क निर्माण के संबंध में केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया जी एवं लोकनिर्माण विभाग मंत्री मध्यप्रदेश श्री गोपाल भार्गव जी, लोकनिर्माण विभाग राज्यमंत्री श्री सुरेश राठखेड़ा जी को अवगत कराया तथा, इस प्रोजेक्ट हेतु राशि स्वीकृत कराने हेतु समय-समय पर पत्राचार किया। जिसके क्रम में कार्यवाही करते हुए लोकनिर्माण विभाग के प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा रविवार दिनांक 28-08-2022 को मौके का स्थल निरीक्षण किया गया। जानकारी के अनुसार अब किले पर प्रवेश हेतु सड़क निर्माण पीछे की ओर से किया जाएगा, क्योंकि वहाँ से सुगमता से मार्ग बनाया जा सकता है, जो कि निर्माण के अनुकूल है। तथा पिछले प्रोजेक्ट की शेष राशि से किले के अग्रभाग में अधूरे पड़े कार्य को पेवरब्लॉक्स लगाकर पूर्ण किया जाएगा।


स्मरण रहे कि नरवर राजा नल-दमयंती की प्राचीन नगरी है, जिसका उल्लेख महाभारत के वनपर्व में आता है। श्रीहर्ष रचित विश्व प्रसिद्ध संस्कृति ग्रन्थ नैषिधीयचरितम में नरवर को प्राचीन निषध देश बतलाया गया है, जो बाद में नलपुल नाम से जाना गया और वर्तमान में नरवर नाम से जाना जाता है। इस अवसर पर श्रीमती माहेश्वरी ने कहा कि हमें नरवर को न केवल प्रदेश में, बल्कि देश में सबसे स्वच्छ, सुन्दर और आकर्षक नगर बनाना है। पर्यटन की अपार संभावनाएं हमारे नरवर में मौजूद हैं, जिन पर काम करते हुए नगर में लोगों को न केवल रोजगार उपलब्ध होगा, बल्कि उनके जीवन स्तर में भी सुधार होगा। नरवर को पर्यटन पटल पर अपेक्षित स्थान दिलाने हेतु हमारे प्रयास सदैव जारी रहेंगे। उन्होंने स्थानीय नागरिकों से शहर की बेहतरी में सहयोग हेतु आग्रह भी किया।

इस मौके पर विशेष रूप से बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति सदस्य संदीप माहेश्वरी, करैरा जनपद अध्यक्ष पुष्पेन्द्र-जसमन्त जाटव, नप नरवर उपाध्यक्ष बिजेंद्र सिंह गुर्जर, पूर्व नप अध्यक्ष एवं इतिहासकार डॉ. मनोज माहेश्वरी, पूर्व नप उपाध्यक्ष एवं वर्तमान परिषद में पार्षद राकेश सोनी, सांसद प्रतिनिधि फिरोज़ खान, नप पार्षद मुलायम सिंह कुशवाह, युवा भाजपा नेता रोहित मिश्रा मगरौनी तथा स्थानीय प्रशासन जिसमें PWD SDO हरिओम अग्रवाल, PWD के एग्जेक्युटिव इंजीनियर, नवागत तहसीलदार नरवर विजय कुमार शर्मा एवं संबंधित हलका पटवारी समेत अन्य कर्मचारी तथा स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।


आपस में विमर्श-चर्चा करते नरवर केे स्थानीय जनप्रतिनिधिगण


नरवर दर्शन
(भारतीय इतिहास, विरासत, पर्यटन, प्रकृति, शिक्षा, साहित्य, कला और संस्कृति का संवाहक)


शुक्रवार, 16 जुलाई 2021

ग्वालियर से पुणे, अहमदाबाद और मुम्बई के लिए विमानन सेवाएँ शुरू | Flights from Gwalior to Pune Ahemdabad and Mumbai | Gwalior Flights

ग्वालियर से शुरू हुई नई विमानन सेवाएँ, अब कर सकेंगे पुणे, अहमदाबाद और मुम्बई का हवाई सफर

Team : Narwar Darshan


#GoodMorning with #GoodNews

ग्वालियर-पुणे
पुणे-ग्वालियर
जबलपुर- सूरत
सूरत- जबलपुर
ग्वालियर-अहमदाबाद
अहमदाबाद-ग्वालियर
ग्वालियर-मुम्बई
मुम्बई-ग्वालियर
रास्ता हुआ आसान नई उड़ानों की होगी शुरुआत
किस समय उड़ेगी उड़ान कब पहुंचेगी निर्धारित स्थान देखें तालिका 👇




#NarwarDarshan #BreakingNews #Gwalior #Flight #Pune #Jabalpur #Surat #ahmedabad #Mumbai #Maharashtra #Gujrat #MadhyaPradesh #JyotiradityaScindia

शुक्रवार, 4 दिसंबर 2020

चाय प्रेमियों के लिए Special Street Tea Exploration | Narwar Darshan



सफ़र के दौरान 'अच्छी चाय' की चाह रखने वाले साथियों के लिए!

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ग्वालियर जाने के लिए भितरवार से लगभग 2KM दूरी पर, बागबही से छीमक ले लिए टर्न है। छीमक में ही डबरा-ग्वालियर रोड पर दायीं ओर 'मोहनलाल' जी की 'मोहन टी स्टॉल' है।

वे व्यवहार में बड़े सज्जन व्यक्ति हैं। अदरक और इलाइची की जैसी सुगंध उनकी बनाई चाय से आती है, वैसा ही सुगंधित और सहज उनका व्यक्तित्व है।

कभी मौका लगे तो एक बार उनकी चाय का स्वाद जरूर चखिए!

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रविवार, 26 अप्रैल 2020

An Interesting story of Nal-Damayanti's Swayamvara | नल-दमयंती के स्वयंवर की रोचक कथा।


निषध नरेश राजा नल और दमयन्ती की स्वयंवर कथा

फोटो स्टोरी यहाँ पढिए - नल-दमयंती कथा



एक दिन राजा नल ने अपने महल के उद्यान में कुछ हंसों को देखा। उन्होंने एक हंस को पकड़ लिया। हंस ने कहा—‘आप मुझे छोड़ दीजिये तो हम लोग दमयन्ती के पास जाकर आपके गुणों का ऐसा वर्णन करेंगे कि वह आपको अवश्य वर लेगी।’ नल ने हंसको छोड़ दिया। वे सब उड़कर विदर्भ देश में गये। दमयन्ती अपने हंसों को देखकर बहुत प्रसन्न हुई और हंसों को पकड़ने के लिये उनकी ओर दौड़ने लगी। दमयन्ती जिस हंस को पकड़ने के लिये दौड़तीवही बोल उठता कि अरी दमयन्ती ! निषाद देश में एक नल नाम का राजा है। वह अश्विनीकुमार के समान सुन्दर है। मनुष्यों में उसके समान सुन्दर और कोई नहीं है। वह मानो मूर्तिमान् कामदेव है। यदि तुम उसकी पत्नी हो जाओ तो तुम्हारा जन्म और रूप दोनों सफल हो जायँ। हम लोगों ने देवतागंधर्वमनुष्यसर्प और राक्षसों को घूम-घूमकर देखा है नल के समान कहीं सुन्दर पुरुष देखने में नहीं आया। जैसे तुम स्त्रियों में रत्न होवैसे ही नल पुरुषों में भूषण है। तुम दोनों की जोड़ी बहुत ही सुन्दर होगी।’ दमयन्ती ने कहा—‘हंस ! तुम नल से भी ऐसी बात कहना।’ हंस ने निषाद देश में लौटकर नल से दमयन्ती का संदेश कह दिया।

दमयन्ती हंस के मुँह से राजा नल की कीर्ति सुनकर उनसे प्रेम करने लगी। उसकी आसक्ति इतनी बढ़ गयी कि वह रात-दिन उनका ही ध्यान करती रहती। शरीर धूमिल और दुबला हो गया। वह दीन-सी दीखने लगी। सखियों ने दमयन्ती के हृदय का भाव ताड़कर विदर्भराज से निवेदन किया कि आपकी पुत्री अस्वस्थ हो गयी है।’ राजा भीम ने अपनी पुत्री के सम्बन्ध में बड़ा विचार किया। अन्त में वह इस निर्णय पर पहुँचे कि मेरी पुत्री विवाहयोग्य हो गयी हैइसलिये इसका स्वयंवर कर देना चाहिये। उन्होंने सब राजाओं को स्वयंवर का निमन्त्रण-पत्र भेज दिया और सूचित कर दिया कि राजाओं को दमयन्ती के स्वयंवर में पधारकर लाभ उठाना चाहिये और मेरा मनोरथ पूर्ण करना चाहिये। देश-देश के नरपति हाथीघोड़े और रथों की ध्वनि से पृथ्वी को मुखरित करते हुए सज-धजकर विदर्भ देश में पहुँचने लगे। भीम ने सबके स्वागत सत्कार की समुचित व्यवस्था की।

देवर्षि नारद और पर्वत के द्वारा देवताओं को भी दमयन्ती के स्वयंवर का समाचार मिल गया। इन्द्र आदि सभी लोकपाल भी अपनी मण्डली और वाहनों सहित विदर्भ देश के लिये रवाना हुए। राजा नल का चित्त पहले से ही दमयन्ती पर आसक्त हो चुका था। उन्होंने भी दमयन्ती के स्वयंवर में सम्मिलित होने के लिये विदर्भ देश की यात्रा की। देवताओं ने स्वर्ग से उतरते समय देख लिया कि कामदेव के समान सुन्दर नल दमयन्ती के स्वयंवर के लिये जा रहे हैं। नल की सूर्य के समान कान्ति और लोकोत्तर रूप-सम्पत्ति से देवता भी चकित हो गये। उन्होंने पहिचान लिया कि ये नल हैं। उन्होंने अपने विमानों को आकाश में खड़ा कर दिया और नीचे उतरकर नल से कहा—‘राजेन्द्र नल ! आप बड़े सत्यव्रती हैं। आप हम लोगों की सहायता करने के लिए दूत बन जाइये।’ नल ने प्रतिज्ञा कर ली और कहा कि करूँगा। फिर पूछा कि आप लोग कौन हैं और मुझे दूत बनाकर कौन-सा काम लेना चाहते हैं ?’ इन्द्र ने कहा—‘हमलोग देवता हैं। मैं इन्द्र हूँ और ये अग्निवरुण और यम हैं। हम लोग दमयन्ती के लिये यहाँ आये हैं।
देवताओं ने नल से कहा कि आप हमारे दूत बनकर दमयन्ती के पास जाइये और कहिए कि इन्द्रवरुणअग्नि और यमदेवता तुम्हारे पास आकर तुमसे विवाह करना चाहते हैं। इनमें से तुम चाहे जिस देवता को पति के रूप में स्वीकार कर लो।’ नल ने दोनों हाथ जोड़कर कहा कि देवराज’ ! वहाँ आप लोगों के और मेरे जाने का एक ही प्रयोजन है। इसलिये आप मुझे दूत बनाकर वहाँ भेजेंयह उचित नहीं है। जिसकी किसी स्त्री को पत्नी के रूप में पाने की इच्छा हो चुकी होवह भलाउसको कैसे छोड़ सकता है और उसके पास जाकर ऐसी बात कह ही कैसे सकता है ? आप लोग कृपया इस विषय में मुझे क्षमा कीजिये

दमयन्ती का स्वयंवर और विवाह

दमयन्ती का स्वयंवर हुआ जिसमें न केवल धरती के राजाबल्कि देवता भी नल का रूप धरकर आ गए। स्वयंवर में एक साथ कई नल खड़े थे। सभी परेशान थे कि असली नल कौन होगा। लेकिन दमयन्ती जरा भी विचलित नहीं हुई। उसने आंखों से ही असली नल को पहचान लिया। सारे देवताओं ने भी उनका अभिवादन किया। इस तरह आंखों में झलकते भावों से ही दमयंती ने असली नल को पहचानकर अपना जीवनसाथी चुन लिया। नव-दम्पत्ति को देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त हु्आ। दमयन्ती निषाद-नरेश राजा नल की महारानी बनी। दोनों बड़े सुख से समय बिताने लगे।
दमयन्ती पतिव्रताओं में शिरोमणि थी। अभिमान तो उसे कभी छू भी न सकता था। समयानुसार दमयन्ती के गर्भ से एक पुत्र और एक कन्या का जन्म हुआ। दोनों बच्चे माता-पिता के अनुरूप ही सुन्दर रूप और गुणसे सम्पन्न थे। समय सदा एक-सा नहीं रहतादुःख-सुख का चक्र निरन्तर चलता ही रहता है। वैसे तो महाराज नल गुणवान्धर्मात्मा तथा पुण्यश्लोक थेकिन्तु उनमें एक दोष था जुए का व्यसन। नल के एक भाई का नाम पुष्कर था। वह नल से अलग रहता था। उसने उन्हें जुए के लिए आमन्त्रित किया। खेल आरम्भ हुआ। भाग्य प्रतिकूल था। नल हारने लगेसोनाचाँदीरथराजपाट सब हाथ से निकल गया। महारानी दमयन्ती ने प्रतिकूल समय जानकर अपने दोनों बच्चों को विदर्भ देश की राजधानी कुण्डिनपुर भेज दिया।

इधर नल जुए में अपना सर्वस्व हार गये। उन्होंने अपने शरीर के सारे वस्त्राभूषण उतार दिये। केवल एक वस्त्र पहनकर नगर से बाहर निकले। दमयन्ती ने भी मात्र एक साड़ी में पति का अनुसरण किया। एक दिन राजा नल ने सोने के पंख वाले कुछ पक्षी देखे। राजा नल ने सोचायदि इन्हें पकड़ लिया जाय तो इनको बेचकर निर्वाह करने के लिए कुछ धन कमाया जा सकता है। ऐसा विचारकर उन्होंने अपने पहनने का वस्त्र खोलकर पक्षियों पर फेंका। पक्षी वह वस्त्र लेकर उड़ गये। अब राजा नल के पास तन ढकने के लिए भी कोई वस्त्र न रह गया। नल अपनी अपेक्षा दमयन्ती के दुःख से अधिक व्याकुल थे। एक दिन दोनों जंगल में एक वृक्ष के नीचे एक ही वस्त्र से तन छिपाये पड़े थे। दमयन्ती को थकावट के कारण नींद आ गयी। राजा नल ने सोचादमयन्ती को मेरे कारण बड़ा दुःख सहन करना पड़ रहा है। यदि मैं इसे इसी अवस्था में यहीं छोड़कर चल दूँ तो यह किसी तरह अपने पिताके पास पहुँच जायगी।

यह विचारकर उन्होंने तलवार से उसकी आधी साड़ी को काट लिया और उसी से अपना तन ढककर तथा दमयन्ती को उसी अवस्था में छोड़ कर वे चल दिये। जब दमयन्ती की नींद टूटी तो बेचारी अपने को अकेला पाकर करुण विलाप करने लगी। भूख और प्यास से व्याकुल होकर वह अचानक अजगर के पास चली गयी और अजगर उसे निगलने लगा। दमयन्ती की चीख सुनकर एक व्याध ने उसे अजगर का ग्रास होने से बचाया। किंतु व्याध स्वभाव से दुष्ट था। उसने दमयन्ती के सौन्दर्य पर मुग्ध होकर उसे अपनी काम-पिपासा का शिकार बनाना चाहा। दमयन्ती उसे शाप देते हुए बोली—‘यदि मैंने अपने पति राजा नल को छोड़कर किसी अन्य पुरुष का कभी चिन्तन न किया हो तो इस पापी व्याध के जीवन का अभी अन्त हो जाय। दमयन्ती की बात पूरी होते ही व्याध मृत्यु को प्राप्त हुआ।
दैवयोग से भटकते हुए दमयन्ती एक दिन चेदिनरेश सुबाहु के पास और उसके बाद अपने पिता के पास पहुँच गयी। अंततः दमयन्ती के सतीत्व के प्रभाव से एक दिन महाराज नल के दुःखो का भी अन्त हुआ। दोनों का पुनर्मिलन हुआ और राजा नल को उनका राज्य भी वापस मिल गया।

(साभार - विकिपीडिया)

यहाँ देखिए, नरवर कैसे पहुँचें - How To Reach Narwar


मंगलवार, 28 जनवरी 2020

ऐसे करें किसी यात्रा पर जाने की तैयारी

आपके सफ़र की तैयारी - हमारी जिम्मेदारी



मानव स्वभाव सृष्टि के उद्गम से ही घुमंतु रहा है। मानव ने एक से दूसरे स्थान तक की अनेक यात्राएं की हैं। उसका जिज्ञासु मन उसे एक से दूसरे स्थान तक ले जाता रहा है। लकड़ी के पहिए का आविष्कार होने के बाद वह थोड़ा गति‍शील हुआ। उसे एक से दूसरे स्थान पर जाने में अधिक सुविधा हुई। वह पहले की अपेक्षा अधिक दूरी तय करने लगा।
अगर आप यात्रा पर जाते हैं तो मन बहलाव होता है। व्यक्ति को कुछ दिनों के लिए चिंता-तनाव से मुक्ति मिल जाती है। मन को काफी सुकून मिलता है। व्यक्ति नई ऊर्जा से भर जाता है तथा वह नई उमंग व उत्साह के साथ अपने कार्य में सम्मिलित हो जाता है। इससे व्यक्ति की कार्यक्षमता बढ़ती है तथा उसे मानसिक तनाव भी कम से कम होता है।
निरंतर प्रगतिरत रहते हुए आज मनुष्य ने बहुत लम्बे समय की यात्रा को कुछ ही घण्टों में तय करने के साधन इज़ाद कर लिए हैं। जब कभी हम घूमने के लिए अपने शहर से बाहर निकलते हैं तो हम पूरी तैयारी के साथ निकलते हैं। लेकिन तब भी हम कई महत्वपूर्ण चीजों को भूल जाते हैं।

आज इस पोस्ट में जानते हैं कि किसी यात्रा पर निकलने से पहले हमें किस प्रकार यात्रा की तैयारी करनी चाहिए –

पर्यटक स्थल का चुनाव :

यात्रा पर निकलने का सबसे महत्वपूर्ण बिन्दु है उस पर्यटक स्थल का चुनाव जहाँ हम घूमने जाना चाहते हैं। आपको सबसे पहले यह तय करना होगा कि अपने को जाना कहां है। जब इच्‍छित मंजिल का तय हो जाए तो यात्रा के दौरान लगने वाले सामान की सूची बना लीजिए। इससे आपको यात्रा के दौरान किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।

यात्रा के दौरान ये सामान आवश्यक रूप से आपके पास होना चाहिए :

(1) मौसम के अनुसार पर्याप्त कपड़े, (2) साबुन, (3) तेल-कंघा, (4) जूते-मोजे, (5) टॉवेल,  (6) गर्म कपड़े (अगर बर्फीले स्थान पर जा रहे हो तो) (7) मोबाइल (साथ में चार्जर भी) (8) घड़ी, (9) सूटकेस चेन, (10) जरूरी दवाएं, (11) एटीएम कार्ड, (12) टॉर्च, (13) कैमरा (यात्रा के लम्हों को कैद करने हेतु) आदि।

रिजर्वेशन जरूर कराएँ :

लम्बी यात्रा पर जाने से पहले रेलवे, बस या हवाई जहाज व होटल, धर्मशाला या लॉज आदि का रिजर्वेशन जरूर करा लें, क्योंकि किसी भी स्थान पर जाने के लिए रिजर्वेशन का होना जरूरी है। ऐन वक्त पर रिजर्वेशन चाहने से उसकी प्राप्ति कई बार नहीं हो पाती है। रेलवे ने आजकल 120 दिन पहले यानी कि 4 माह पूर्व से रिजर्वेशन की सुविधा दे दी है। अगर आपका जाना तय ही हो तो इसका समुचित लाभ हर किसी को जरूर उठाना चाहिए। रिजर्वेशन स्वयं जाकर या इंटरनेट के माध्‍यम से कराना ज्यादा ठीक रहता है।

ग्रुप में करें यात्रा :

ग्रुप में यात्रा करने से अनेक प्रकार की चिंताओं से आप मुक्त हो सकते हैं। किसी भी आकस्मिक परिस्थि‍ति में ग्रुप के साथीगण आपकी जरूर मदद करेंगे। कपल में यात्रा करने पर कोई आकस्मिक काम पड़ने या घटना-दुर्घटना की स्थिति में आपको संभवत: किसी की मदद नहीं मिलेगी, क्योंकि सभी लोग यात्रा का आनंद उठाने आते हैं, परेशानी भोगने नहीं। इसलिए ग्रुप में यात्रा करना अधिक सुविधाजनक हो सकता है।


किसी अनजान जगह पर, साईट पर अकेले न जाएँ :

किसी पर्यटक स्थल पर जब आप कोई भी जगह (साइट) देखने निकलते हैं, तो उस जगह पर अकेले न जाकर ग्रुप में जाएं। अगर कोई ऐतिहासिक पर्यटक स्थल देखने जा रहे हो तो गाइड जरूर करें, क्योंकि ऐतिहासिक स्थलों के बारे में गाइड के अलावा आपको और कोई अच्‍छी जानकारी नहीं दे सकता है, वह इसलिए कि उसे स्थानीय पर्यटन स्थलों और इतिहास के बारे में ‍अच्‍छी जानकारी होती है।


जंगल की यात्रा में बरतें अधिक सावधानी :

अगर आप जंगलों की सैर पर जा रहे हो तो, स्थानीय वन विभाग की अनुमति अवश्य प्राप्त कर लें, क्योंकि उन्हें जंगलों में रहने वाले वन्य प्राणियों के बारे में अच्‍छी मालूमात रहती है। कई वनों में बिना अनुमति प्रवेश निषेध रहता है। वन विभाग न होने के बारे में स्थानीय ग्रामीणों या ना‍गरिकों से इस बारे में जानकारी जरूर हासिल कर लें।
जीप व जानकार व्यक्ति के साथ ही वन की सैर करना अत्यधिक मुफीद रहेगा। जंगली जानवरों के अधिक समीप न जाएं, क्योंकि उनके द्वारा हमला कर दिए जाने का खतरा बना रहता है। उन्हें छेड़े नहीं, न ही आवाज / पत्थर आदि मारें अन्यथा आपकी जान का जोखिम रह सकता है।


इन सब बातों के अलावा भी कई और महत्वपूर्ण बातें होती हैं जिनका ध्यान रखा जाना चाहिए। हालाँकि घुमक्कड़ लोग जानते हैं कि उन्हें कैसे अपनी यात्रा को सुरक्षित और आनन्दमय बनाना है।
इस प्रकार की तैयारी से आप धार्मिक, हरी-भरी वादियों तथा ऐतिहासिक स्थलों आदि का भरपूर लुत्फ उठा सकते हैं। फिर देर किस बात की? अभी से तैयारी में जुट जाइए। आपकी शुभ यात्रा की कामना के साथ

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