श्री लोढीमाता की पवित्र पावन भूमि नरवर मध्यप्रदेश के ग्वालियर संभाग अंतर्गत आने वाले शिवपुरी जिले में स्थित है। राजा नल-दमयंती की ऐतिहासिक नगरी नरवर का उल्लेख महाभारतकाल में नलपुर के नाम से मिलता है। नरवर अपने इतिहास, विरासत, प्रकृति और लोढीमाता के चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ प्राचीन नरवर किला, श्री लोढीमाता मंदिर, श्री टपकेश्वर महादेव, मडीखेडा बाँध, मोहनी सागर बाँध तथा ग्वालियर जिले में नरवर की सीमा से लगा हुआ हरसी बाँध जैसे बडे-बाँध तीर्थ स्थल और पर्यटक स्थल के रूप में विद्यमान हैं। इसके अलावा नरवर में अनेक झील, झरने, तालाब और सिंध नदी का रमणीक तट भी मनमोहक है।
शुक्रवार, 7 जून 2024
ग्वालियर से नरवर की दूरी, दिशा, किराया और आवागमन के लिए उपलब्ध साधनों की सम्पूर्ण जानकारी
श्री लोढीमाता की पवित्र पावन भूमि नरवर मध्यप्रदेश के ग्वालियर संभाग अंतर्गत आने वाले शिवपुरी जिले में स्थित है। राजा नल-दमयंती की ऐतिहासिक नगरी नरवर का उल्लेख महाभारतकाल में नलपुर के नाम से मिलता है। नरवर अपने इतिहास, विरासत, प्रकृति और लोढीमाता के चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ प्राचीन नरवर किला, श्री लोढीमाता मंदिर, श्री टपकेश्वर महादेव, मडीखेडा बाँध, मोहनी सागर बाँध तथा ग्वालियर जिले में नरवर की सीमा से लगा हुआ हरसी बाँध जैसे बडे-बाँध तीर्थ स्थल और पर्यटक स्थल के रूप में विद्यमान हैं। इसके अलावा नरवर में अनेक झील, झरने, तालाब और सिंध नदी का रमणीक तट भी मनमोहक है।
सोमवार, 31 अक्टूबर 2022
मध्यप्रदेश गान हिन्दी में | Hindi lyrics of Madhya Pradesh Gaan | मध्यप्रदेश की स्थापना कब हुई? मध्यप्रदेश गान के लेखक कौन हैं? Madhya Pradesh Song
Madhya Pradesh Song
मध्यप्रदेश गान
सुख का दाता सब का साथी शुभ का यह संदेश है,
माँ की गोद, पिता का आश्रय मेरा मध्यप्रदेश है।
विंध्याचल सा भाल नर्मदा का जल जिसके पास है,
यहां ज्ञान विज्ञान कला का लिखा गया इतिहास है।
उर्वर भूमि, सघन वन, रत्न, सम्पदा जहां अशेष है,
स्वर-सौरभ-सुषमा से मंडित मेरा मध्यप्रदेश है।
सुख का दाता सब का साथी शुभ का यह संदेश है,
माँ की गोद, पिता का आश्रय मेरा मध्यप्रदेश है।
चंबल की कल-कल से गुंजित कथा तान, बलिदान की,
खजुराहो में कथा कला की, चित्रकूट में राम की।
भीमबैठका आदिकला का पत्थर पर अभिषेक है,
अमृत कुंड अमरकंटक में, ऐसा मध्यप्रदेश है।
क्षिप्रा में अमृत घट छलका मिला कृष्ण को ज्ञान यहां,
महाकाल को तिलक लगाने मिला हमें वरदान यहां।
कविता, न्याय, वीरता, गायन, सब कुछ यहां विषेश है,
ह्रदय देश का है यह, मैं इसका, मेरा मध्यप्रदेश है।
सुख का दाता सब का साथी शुभ का यह संदेश है,