Jantar Mantar Protest Live: जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ सोनम वांगचुक और CJP का बड़ा आंदोलन। जानिए क्यों धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा बना मुख्य मांग, और वांगचुक ने अनशन तोड़ने के लिए सरकार के सामने क्या नई शर्त रखी है।
राष्ट्रीय डेस्क (नरवर समाचार)। देश की प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग और लाखों छात्रों के भविष्य को लेकर दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर बड़े जनांदोलन का केंद्र बना हुआ है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा शुरू किए गए इस आंदोलन को जब लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक का समर्थन मिला और वे अनशन पर बैठे, तो इस मुद्दे ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
पिछले दिनों 'चलो संसद' (Chalo Sansad) मार्च के दौरान हुई भारी पुलिसिया कार्रवाई, लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों के बाद माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है।
🛑 सोनम वांगचुक के अनशन का 25वां दिन: अस्पताल से जारी किया भावुक संदेश
28 जून से अनवरत अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक का वजन करीब 11 किलो गिर चुका है और स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें गुरुग्राम के मेदांता/सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
आज 23 जुलाई को अपने अनशन के 25वें दिन अस्पताल से एक नया वीडियो संदेश जारी करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा:
"मैं अभी जीवित हूँ... अनशन का 25वां दिन है और 11 किलो वजन घट चुका है। मैं अपने छात्रों और अपनी शिक्षा की दुनिया में वापस लौटना चाहता हूँ। लेकिन मैं उन मासूम युवाओं की बलि देकर वापस नहीं लौट सकता जिन्होंने अपने हक के लिए आवाज उठाई है।"
अनशन तोड़ने के लिए वांगचुक की नई शर्त:
केन्द्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह से हुई मुलाकात के बाद वांगचुक ने स्पष्ट किया है कि वे अपना अनशन समाप्त करने के लिए तैयार हैं, लेकिन सरकार को एक ठोस लिखित आश्वासन देना होगा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं पर पुलिस कोई दंडात्मक/कानूनी कार्रवाई या FIR दर्ज नहीं करेगी।
💥 CJP की मुख्य मांग: 'धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नॉन-नेगोशिएबल'
दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर डटे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके और प्रवक्ता सौरव दास ने आज सुबह साफ कर दिया कि आंदोलन तब तक खत्म नहीं होगा जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर मुहर नहीं लगा देती।
CJP की प्रमुख 4 मांगें:
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपनी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें या उन्हें बर्खास्त किया जाए। CJP ने स्पष्ट कहा है कि यह मांग 'नॉन-नेगोशिएबल' (जिस पर कोई समझौता नहीं हो सकता) है।
पीड़ित परिवारों को मुआयजा: नीट पेपर लीक के तनाव में आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए।
छात्रों पर दर्ज मामले वापस हों: प्रदर्शनकारी युवाओं के खिलाफ पुलिस द्वारा दर्ज 10 से अधिक FIR और मामले तुरंत रद्द किए जाएं।
एजुकेशन सिस्टम में बड़ा सुधार: राष्ट्रीय परीक्षाओं के संचालन के लिए सख्त कानून और फुलप्रूफ सिस्टम बनाया जाए।
🏛️ सरकार का रुख और पीएम मोदी का बड़ा ऐलान
संसद सत्र के दौरान इस मुद्दे को लेकर गृह मंत्री अमित शाह, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और जेपी नड्डा के बीच कई दौर की मैराथन बैठकें हुई हैं।
फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन: आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जानकारी देते हुए कहा कि सरकार पेपर लीक जैसे गंभीर अपराधों में संलिप्त दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए 'फास्ट-ट्रैक कोर्ट' (Fast-Track Courts) का गठन करने जा रही है और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
इस्तीफे पर सरकार का रुख: हालांकि, सरकारी सूत्रों के अनुसार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे पर सरकार ने अभी कोई सीधी प्रतिबद्धता नहीं जताई है, लेकिन पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने और न्याय दिलाने के आश्वासन पर सकारात्मक विचार किया जा रहा है।
🎯 'नरवर दर्शन' का विश्लेषण
जंतर-मंतर से उठा यह जनआंदोलन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के हर छोटे शहर और ग्रामीण अंचल में रहने वाले उन लाखों मध्यमवर्गीय छात्रों के सपनों से जुड़ा है जो दिन-रात मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। सोनम वांगचुक का गिरता स्वास्थ्य और छात्रों का यह अनुशासित शांतिपूर्ण आंदोलन देश के शिक्षा तंत्र में एक बड़े और क्रांतिकारी बदलाव की मांग कर रहा है।
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