शुक्रवार, 17 जुलाई 2026

नरवर किले पर डाका: 30 हथियारबंद बदमाशों ने गार्डों को खदेड़ा, 400 साल पुरानी अष्टधातु की ऐतिहासिक तोप चोरी!

Narwar Fort Dacoity: 15-16 जुलाई 2026 की रात नरवर किले की ओपन कचहरी से 16वीं शताब्दी की बहुमूल्य अष्टधातु की तोप चोरी हो गई। 30 हथियारबंद बदमाशों ने गार्डों को बंधक बनाकर वारदात को अंजाम दिया। जानिए पूरी ग्राउंड रिपोर्ट।

नरवर (नरवर समाचार डेस्क)। भगवान राम के पुत्र कुश की राजधानी और राजा नल-दमयंती की ऐतिहासिक कर्मस्थली नरवर किले से चोरों ने कानून-व्यवस्था और पुरातत्व विभाग की धज्जियां उड़ा दी हैं। 15-16 जुलाई 2026 की दरमियानी रात करीब 25 से 30 हथियारबंद बदमाशों ने किले पर धावा बोलकर पहरा दे रहे सुरक्षाकर्मियों को खदेड़ दिया और 16वीं शताब्दी की एक बेहद दुर्लभ और अमूल्य तोप लूटकर ले गए।

अंतरराष्ट्रीय ब्लैक मार्केट में करोड़ों रुपये कीमत की इस ऐतिहासिक धरोहर की चोरी के बाद से पूरे नरवर अंचल के नागरिकों और इतिहास प्रेमियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

🛑 डंडे और टॉर्च के भरोसे सुरक्षा: 30 हथियारबंद बदमाशों का हमला

वारदात की रात ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी बाल किशन ने बताया कि रात में अचानक 30 के करीब हथियारबंद बदमाश किले के पिछले दुर्गम रास्ते से लोडिंग गाड़ियां लेकर ऊपर दाखिल हुए।

सुरक्षाकर्मी की जुबानी: "हमारे पास सुरक्षा के नाम पर सिर्फ एक डंडा था, रोशनी के लिए टॉर्च तक नहीं थी। बदमाशों ने हमें घेरकर जान से मारने की धमकी दी। अपनी जान बचाने के लिए हमें वहां से भागना पड़ा।"

बदमाशों ने किले के 'कचहरी महल' में रखीं कुल 14 ऐतिहासिक तोपों में से एक भारी-भरकम मुख्य तोप को निशाना बनाया और उसे अपने साथ लूट ले गए, जिसके बाद अब वहां केवल 13 तोपें ही बची हैं।

🚨 12 दिन पहले ही मिला था 'ट्रेलर', फिर भी सोता रहा पुरातत्व विभाग

इस पूरी घटना में राज्य पुरातत्व विभाग की अकर्मण्यता और घोर लापरवाही उजागर हुई है।

  • 3 जुलाई को हुई थी पहली कोशिश: चोरों ने इस बड़ी वारदात को अंजाम देने की पहली कोशिश 14 दिन पहले यानी 3 जुलाई को ही की थी। उन्होंने भारी-भरकम तोप को उसकी जगह से नीचे गिरा दिया था, लेकिन वजन ज्यादा होने के कारण वे उस समय उसे ले जा नहीं सके।

  • नहीं जागे अधिकारी: इस घटना की भनक पुरातत्व विभाग को लग चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। नतीजा यह हुआ कि 15-16 जुलाई की रात बदमाश पूरी तैयारी और लोडिंग गाड़ियों के साथ लौटे और बड़े आराम से तोप लादकर फरार हो गए। किले के पिछले दुर्गम रास्ते पर गाड़ियों के टायरों के निशान इसके पुख्ता सबूत हैं।

💎 क्यों बेहद खास है यह तोप और क्या है इसकी कीमत?

नरवर किले की ओपन कचहरी में रखीं ये तोपें ऐतिहासिक और वास्तुकला की दृष्टि से अनमोल हैं:

  • अष्टधातु का बेजोड़ मिश्रण: यह तोप सोना, चाँदी, पीतल, तांबा, कांसा जैसी विशेष अष्टधातु मिश्रित धातुओं से ढाली गई थी, जिन पर राजचिह्न और फारसी-देवनागरी लिपियां अंकित हैं।

  • करोड़ों की कीमत: ऐतिहासिक धरोहर होने के कारण आधिकारिक तौर पर तो ये अमूल्य हैं, लेकिन पुलिस और विशेषज्ञों के अनुसार लंदन और न्यूयॉर्क के अवैध ऑक्शन हाउस (ब्लैक मार्केट) में 16वीं शताब्दी की ऐसी दुर्लभ तोपों की कीमत ₹2 करोड़ से ₹5 करोड़ तक होती है। इसी कारण इसमें किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय एंटीक तस्कर गिरोह का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है।

😡 लगातार उपेक्षा और दफीनाखोरों की मांद बनता नरवर किला

यह चोरी कोई अचानक हुई घटना नहीं है, बल्कि नरवर किले की लंबे समय से की जा रही उपेक्षा का नतीजा है।

  1. सुरक्षा दीवारें ध्वस्त: नरवर किला पीछे के हिस्से से पूरा खुला हुआ है। कई जगहों से इसकी मुख्य बाउंड्री वॉल टूटी पड़ी है, जिससे असामाजिक तत्वों और तस्करों को आसानी से रास्ता मिल जाता है।

  2. दफीनाखोरों का आतंक: किले पर आए दिन धन की चाह रखने वाले दफीनाखोर अवैध खुदाई करते रहते हैं। विगत दिनों भी किले के भीतर स्थित पसरदेवी माता मंदिर के पास धन के लालच में गहरी सुरंग खोदने की सनसनीखेज घटना सामने आई थी।

  3. सिर्फ अवैध वसूली पर ध्यान: स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का आरोप है कि पुरातत्व विभाग के कर्मचारी किले के संरक्षण और सुरक्षा पर ध्यान देने के बजाय केवल सैलानियों और स्थानीय लोगों से अवैध रूप से पैसे उगाहने में व्यस्त रहते हैं। मध्य प्रदेश के अन्य सभी प्रमुख किलों पर पर्यटन और सुरक्षा को लेकर बेहतरीन काम हो रहा है, लेकिन नरवर किला प्रशासनिक अनदेखी के कारण आंसू बहा रहा है।

📞 प्रशासनिक हलचल और आगे की कार्रवाई

घटना के बाद 16 जुलाई को केयरटेकर ने नरवर थाने में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है। हालांकि, शुरुआत में पुलिस मामले को ठंडे बस्ते में डालती नजर आ रही थी, लेकिन मीडिया और जनता के दबाव के बाद पुलिस एक्टिव हुई है।

करैरा के एसडीओपी (SDOP) प्रशांत शर्मा ने बताया कि मामले में किसी अंतरराष्ट्रीय गिरोह की सक्रियता से इनकार नहीं किया जा सकता, पुलिस गहन जांच कर रही है। वहीं राज्य पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर पी.सी. महोबिया ने कहा है कि वे स्वयं नरवर किले का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेंगे और पुलिस पर तोप की जल्द बरामदगी का दबाव बनाएंगे।

🎯 'नरवर दर्शन' का निष्कर्ष और मांग

हमारी अमूल्य धरोहर का इस तरह दिन-दहाड़े चोरी हो जाना हर नरवर वासी के आत्मसम्मान पर चोट है। 'नरवर दर्शन' प्रशासन से मांग करता है कि चोरों को अविलंब गिरफ्तार कर हमारी तोप वापस किले में स्थापित की जाए और लापरवाही बरतने वाले पुरातत्व विभाग के अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। साथ ही, पूरे किले की बाउंड्री वॉल को दुरुस्त कर वहां पर पक्की सशस्त्र सुरक्षा चौकियां बनाई जाएं।

नरवर अंचल के इतिहास, संस्कृति और इस चोरी से जुड़ी हर एक लाइव अपडेट के लिए आपके अपने ब्लॉग 'नरवर दर्शन' से जुड़े रहें। इस खबर को अधिक से अधिक शेयर करें ताकि सोई हुई सरकार तक हमारी आवाज पहुंच सके!

#NarwarFort #NarwarDarshan #NarwarKila #तोपचोरी #नरवरकिला

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें