बुधवार, 4 नवंबर 2026

भारत के ऐतिहासिक किलों से जुड़े 100 प्रामाणिक, स्थापत्य, सैन्य-रणनीतिक और ऐतिहासिक तथ्यों की राज्यवार व श्रेणीबद्ध सूची

भारत के ऐतिहासिक किलों से जुड़े 100 प्रामाणिक, स्थापत्य, सैन्य-रणनीतिक और ऐतिहासिक तथ्यों की राज्यवार व श्रेणीबद्ध सूची:

राजस्थान के दुर्ग (1 से 28)

  1. कुंभलगढ़ की दीवार (ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया): महाराणा कुंभा द्वारा निर्मित कुंभलगढ़ दुर्ग की सुरक्षा प्राचीर 36 किलोमीटर लंबी है। चीन की दीवार के बाद यह विश्व की दूसरी सबसे लंबी निरंतर सुरक्षा दीवार मानी जाती है।

  1. चित्तौड़गढ़ का क्षेत्रफल: 700 एकड़ में फैला चित्तौड़गढ़ भारत का सबसे बड़ा दुर्ग परिसर है। यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल होने के साथ-साथ तीन ऐतिहासिक जौहर (1303, 1535, 1568 ई.) का साक्षी रहा है।

  2. जयबाण तोप (जयगढ़ दुर्ग, जयपुर): जयगढ़ किले में स्थित पहियों पर रखी 'जयबाण' अपने निर्माण के समय विश्व की सबसे बड़ी तोप थी। इसका वजन 50 टन है और इसकी मारक क्षमता लगभग 35 किलोमीटर आंकी गई थी।

  3. सोनार किला (जैसलमेर) - 'लिविंग फोर्ट': जैसलमेर दुर्ग दुनिया के दुर्लभ 'जीवंत किलों' में से एक है, जहाँ आज भी शहर की लगभग एक-चौथाई आबादी (होटल, दुकानें, पुश्तैनी मकान) किले के परकोटे के भीतर ही निवास करती है।

  4. बिना नींव का किला (गागरोन दुर्ग, झालावाड़): गागरोन का किला आहु और कालीसिंध नदियों के संगम पर बना एक उत्कृष्ट जल-दुर्ग है। यह सीधी प्राकृतिक चट्टान पर खड़ा है; इसकी कोई कृत्रिम नींव नहीं खोदी गई।

  5. मेहरानगढ़ (जोधपुर) का चीड़िया-टूक टीला: राव जोधा द्वारा 1459 में निर्मित मेहरानगढ़ किला 400 फीट ऊंची खड़ी चट्टान पर बना है। किले की दीवारों पर आज भी तोपों के गोलों के प्रामाणिक निशान मौजूद हैं।

  6. रणथंभौर का त्रिनेत्र गणेश: रणथंभौर दुर्ग के भीतर 10वीं शताब्दी का त्रिनेत्र गणेश मंदिर स्थित है। भारत भर से लोग आज भी अपने विवाह और मांगलिक कार्यों का पहला निमंत्रण पत्र डाक द्वारा सीधे इस मंदिर के पते पर भेजते हैं।

  7. आमेर दुर्ग की गुप्त सुरंग: आमेर महल से जयगढ़ दुर्ग तक जाने वाली लगभग 2 किलोमीटर लंबी भूमिगत गुप्त सुरंग आपातकाल में शाही परिवार को सुरक्षित निकालने के लिए बनाई गई थी, जो आज भी संरक्षित है।

  8. शीश महल (आमेर): बेल्जियम से मंगाए गए अवतल शीशों से बना यह कक्ष इस प्रकार डिजाइन किया गया था कि एक मोमबत्ती जलाने पर उसका प्रकाश पूरे कक्ष में हजारों तारों की तरह परावर्तित हो जाता था।

  9. 9. जूनागढ़ दुर्ग (बीकानेर): राजस्थान के अधिकांश पहाड़ी किलों के विपरीत जूनागढ़ एक 'धान्वन दुर्ग' (मैदानी भूमि पर बना) है। इसे कभी कोई बाहरी आक्रांता सैन्य बल से फतह नहीं कर सका।

  10. भानगढ़ दुर्ग (अलवर): 17वीं सदी में राजा माधो सिंह द्वारा बसाया गया यह कस्बा और दुर्ग अपनी वीरान बनावट के लिए जाना जाता है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने यहाँ सूर्यास्त के बाद प्रवेश पर वैधानिक प्रतिबंध लगाया हुआ है।

  11. तारागढ़ दुर्ग (बूंदी) का जल संचयन: बूंदी के तारागढ़ किले में पत्थरों को काटकर विशाल 'भीम बुर्ज' और भूमिगत जलाशय बनाए गए थे, जो भीषण अकाल के समय भी कभी नहीं सूखते थे।

  12. लोहागढ़ दुर्ग (भरतपुर): जाट महाराजा सूरजमल द्वारा निर्मित इस किले की बाहरी दीवार मिट्टी और कीचड़ की मोटी परतों से ढकी थी। ब्रिटिश जनरल लॉर्ड लेक के तोपों के गोले इस मिट्टी में धंसकर ठंडे हो जाते थे; अंग्रेज इसे कभी जीत नहीं सके।

  13. शिवाना दुर्ग (बाड़मेर): 10वीं सदी में परमारों द्वारा निर्मित यह दुर्ग मारवाड़ के राठौड़ शासकों के लिए संकटकालीन आश्रय स्थल (रेफ्यूज फोर्ट) का काम करता था।

  14. अचलगढ़ दुर्ग (माउंट आबू): परमारों द्वारा निर्मित और महाराणा कुंभा द्वारा पुनर्निर्मित इस दुर्ग में 'अचलेश्वर महादेव' मंदिर है, जहाँ शिवलिंग के स्थान पर भगवान शिव के अंगूठे (चरण-अंगुष्ठ) की पूजा होती है।

  15. मांडलगढ़ दुर्ग (भीलवाड़ा): यह बनास, बेड़च और मेनाल नदियों के त्रिवेणी संगम के पास स्थित राजस्थान के सबसे पुराने त्रि-कोणीय सुरक्षा दुर्गों में से एक है।

  16. नीमराना फोर्ट (अलवर): 1464 में निर्मित यह 14 मंजिला पहाड़ी किला पृथ्वीराज चौहान के वंशजों से जुड़ा है, जो आज भारत के सबसे प्रसिद्ध हेरिटेज पैलेस होटलों में तब्दील हो चुका है।

  17. नाहरगढ़ दुर्ग (जयपुर): सवाई जयसिंह द्वारा निर्मित इस दुर्ग में 'माधवेंद्र भवन' है, जिसमें राजा ने अपनी 9 रानियों के लिए एक जैसे 9 दो-मंजिला सुइट्स बनवाए थे, ताकि एक के कमरे में जाने की भनक दूसरी को न लगे।

  18. बाला किला (अलवर दुर्ग): 5 किलोमीटर लंबी दीवार और 51 बड़े व 446 छोटे बुर्जों वाले इस किले में मुगल बादशाह बाबर ने अपनी रात बिताई थी और जहांगीर को भी यहाँ नजरबंद रखा गया था।

  19. सोजत का किला (पाली): सुकड़ी नदी के तट पर स्थित यह किला राव जोधा के समय सीमांत चौकी था। आज सोजत विश्व भर में अपनी जीआई-टैग मेंहदी के लिए भी विख्यात है।

  20. केसरोली फोर्ट (अलवर): 14वीं शताब्दी का यह दुर्ग बौद्ध मठ के अवशेषों और यदुवंशी राजपूतों के स्थापत्य के संगम पर स्थित है।

  21. खींवसर फोर्ट (नागौर): थार रेगिस्तान के मुहाने पर बना यह 16वीं सदी का किला अपने अनूठे सैंड ड्यून और भूमिगत सुरक्षा कक्षों के लिए जाना जाता है।

  22. खंडार दुर्ग (सवाई माधोपुर): रणथंभौर के निकट यह किला इतना दुर्गम था कि इसे 'अजेय दुर्ग' कहा जाता था। इसके भीतर शारदा तोप स्थित है।

  23. बयाना दुर्ग (भरतपुर): प्राचीन 'श्रीपथ' या बाणासुर का किला, जहाँ गुप्त काल के सोने के सिक्कों का भारत का सबसे बड़ा जखीरा (बयाना होर्ड) प्राप्त हुआ था।

  24. कुचामन फोर्ट (डीडवाना-कुचामन): यहाँ अपनी निजी टकसाल (Mint) संचालित करने का विशेष अधिकार था, जहाँ 'कुचामनी सिक्के' ढाले जाते थे।

  25. डूंगरपुर का जूना महल: 13वीं सदी का यह किला बाहर से मजबूत सैन्य दुर्ग दिखता है, लेकिन भीतर दुर्लभ भित्तिचित्रों और कांच की पच्चीकारी का खजाना समेटे हुए है।

  26. पोखरण फोर्ट (जैसलमेर): चंपावतों का यह गढ़ 14वीं सदी का ऐतिहासिक स्थल है, जिसके पास के मरुस्थलीय क्षेत्र में भारत ने 1974 और 1998 के ऐतिहासिक परमाणु परीक्षण किए थे।

  27. शाहबाद दुर्ग (बारां): भामती पहाड़ियों पर स्थित यह दुर्ग अपनी 18 फीट लंबी 'तोप तोपची' और प्राकृतिक खाइयों के लिए मालवा-हाड़ौती सीमा पर विख्यात था।

मध्य प्रदेश के दुर्ग (29 से 42)

  1. ग्वालियर दुर्ग (जिब्राल्टर ऑफ इंडिया): मुगल बादशाह बाबर ने इसे "भारत के किलों के गले का हार" कहा था। इसके चतुर्भुज मंदिर में 875 ईस्वी का वह शिलालेख है, जिसमें संख्या '0' (शून्य) का विश्व का सबसे पुराना प्रामाणिक लिखित प्रमाण मिलता है।

  2. मानमंदिर महल (ग्वालियर): 15वीं सदी में राजा मानसिंह तोमर द्वारा निर्मित इस महल की बाहरी दीवारों पर नीले और पीले चीनी टाइल्स से हाथी, मयूर और बत्तखों की नक्काशी आज भी मूल रंग में सुरक्षित है।

  3. असीरगढ़ का किला (बुरहानपुर): इसे 'दक्कन का प्रवेश द्वार' (की टू द डेक्कन) कहा जाता था। 1601 ईस्वी में अकबर का यह अंतिम सैन्य अभियान था, जिसे लेकर कहा जाता है कि उसने इस किले के सोने की चाबियों से द्वार खोले थे।

  4. मांडू (मांडवगढ़, धार) - 'सिटी ऑफ जॉय': 45 किलोमीटर के परकोटे में फैला मांडू भारत का सबसे बड़ा किलाबंद खंडहर नगर है। यहाँ का 'जहाज महल' दो कृत्रिम झीलों (कपूर और मुंज) के बीच तैरते हुए जहाज की तरह बनाया गया है।

  5. हिंडोला महल (मांडू): इस महल की बाहरी दीवारें 77 डिग्री के कोण पर झुकी हुई हैं, जिससे दूर से देखने पर यह महल किसी झूलते हुए पालने (हिंडोला) जैसा प्रतीत होता है।

  6. नरवर दुर्ग (शिवपुरी): राजा नल और दमयंती की पौराणिक राजधानी 'नलपुर' पर स्थित यह दुर्ग लगभग 8 किलोमीटर की परिधि में फैला है। 1508 में सिकंदर लोदी ने इसे महीनों घेरे रखा था।

  7. नरवर के कचहरी महल की तोपें: नरवर किले की खुली कचहरी में रखी ऐतिहासिक तोपों पर पुरातत्व विभाग द्वारा 26 तक के नंबर अंकित किए गए थे, जो इसके ऐतिहासिक तोपखाने की संपन्नता को प्रमाणित करते हैं।

  8. ओरछा दुर्ग परिसर (निवाड़ी): बेतवा नदी के टापू पर बने इस किले में 'राजा राम मंदिर' स्थित है, जो विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहाँ भगवान श्री राम को भगवान और राजा दोनों रूपों में पूजकर पुलिस द्वारा 'गार्ड ऑफ ऑनर' (सलामी) दिया जाता है।

  9. जहांगीर महल (ओरछा): राजा वीर सिंह देव बुंदेला ने मुगल बादशाह जहांगीर के केवल एक रात के ठहराव के सम्मान में इस बहुमंजिला महल का निर्माण कराया था।

  10. रायसेन का किला: इस किले में 800 साल पुराना विश्व का सबसे शुरुआती वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और प्राचीन वाटर-पंप मैकेनिज्म मिलता है। किले के भीतर एक ही परिसर में मंदिर और मस्जिद दोनों स्थित हैं।

  11. बांधवगढ़ दुर्ग (उमरिया): 2000 वर्ष से अधिक प्राचीन यह दुर्ग रामायण कालीन माना जाता है, जहाँ भगवान राम ने लंका पर नजर रखने के लिए इसे अपने अनुज लक्ष्मण को सौंपा था ('बांधव' यानी भाई का गढ़)।

  12. चंदेरी का किला (अशोकनगर): 1528 में बाबर के आक्रमण के समय राजा मेदिनी राय की वीरांगनाओं ने यहाँ ऐतिहासिक जौहर किया था। किले का मुख्य द्वार एक ही विशाल चट्टान को काटकर 'कटी घाटी' के नाम से बनाया गया है।

  13. मदन महल किला (जबलपुर): 11वीं सदी में गोंड रानी दुर्गावती से जुड़ा यह किला एक विशाल ग्रेनाइट चट्टान के संतुलन (बैलेंसिंग रॉक) पर रणनीतिक वॉचटावर के रूप में निर्मित है।

  14. गढ़कुंडार का किला (निवाड़ी): खंगार राजाओं की यह प्राचीन राजधानी पहाड़ियों के बीच ऐसी भूलभुलैया शैली में बनी है कि 4-5 किलोमीटर दूर से किला स्पष्ट दिखता है, लेकिन पास आते ही यह पहाड़ियों की ओट में आंखों से ओझल हो जाता है।



महाराष्ट्र के दुर्ग (43 से 62)

  1. मुरुड-जंजीरा (रायगढ़): अरब सागर में एक अंडाकार चट्टान पर स्थित यह जल-दुर्ग कभी किसी सैन्य आक्रमण (मराठा, पुर्तगाली या अंग्रेज) द्वारा विजित नहीं किया जा सका। सिद्दी शासकों द्वारा नियंत्रित इस खारे पानी के किले के भीतर मीठे पानी की दो प्राकृतिक झीलें हैं।

  2. दौलताबाद (देवगिरि) दुर्ग (संभाजीनगर): 14वीं सदी में मुहम्मद बिन तुगलक ने इसे अपनी राजधानी बनाया था। इसका 'अंधारी' (Dark Passage) प्रवेश द्वार विश्व के सबसे कठिन सैन्य डिफेंस मैकेनिज्म में गिना जाता है, जहाँ दुश्मनों को भ्रमित कर खौलते तेल और खाइयों में गिराने की व्यवस्था थी।

  3. रायगढ़ किला: छत्रपति शिवाजी महाराज ने 1674 में इसी दुर्ग में अपना राज्याभिषेक कराकर 'हिंदवी स्वराज्य' की औपचारिक स्थापना की थी। 825 मीटर ऊंची खड़ी ढलान पर स्थित यह मराठा साम्राज्य की राजधानी बना।

  4. शिवनेरी दुर्ग (पुणे): त्रिकोणीय आकार की पहाड़ी पर बना यह दुर्ग छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्मस्थान (19 फरवरी 1630) है। किले में प्रवेश के लिए सात विशाल सुरक्षित दरवाजे पार करने होते हैं।

  5. सिंधुदुर्ग (मालवण): छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा 1664 में समुद्र के भीतर कुरटे द्वीप पर निर्मित यह नौसैनिक दुर्ग है। इसकी नींव में हजारों मन पिघला हुआ सीसा (Molten Lead) डाला गया था ताकि समुद्री लहरें इसकी चट्टानों को न काट सकें।

  6. प्रतापगढ़ दुर्ग (सतारा): 1659 में इसी किले की तलहटी में छत्रपति शिवाजी महाराज और बीजापुर के सेनापति अफजल खान का ऐतिहासिक द्वंद्व हुआ था, जहाँ शिवाजी ने बघनखे (Tiger Claws) से अफजल खान का वध किया था।

  7. राजगढ़ दुर्ग (पुणे): शिवाजी महाराज के जीवनकाल में 25 वर्षों से अधिक समय तक मराठा साम्राज्य की पहली स्थायी राजधानी रहा। इसका निर्माण मुरुमदेव पर्वत पर इस प्रकार किया गया था कि कोई तोप इसके केंद्रीय दुर्ग तक नहीं पहुंच सकती थी।

  8. सिंहगढ़ दुर्ग (कोंढाणा): 1670 में सूबेदार तानाजी मालुसरे ने एक विशाल गोह (मॉनिटर लिजार्ड - यशवंती) की मदद से रात के अंधेरे में खड़ी चट्टान चढ़कर मुगलों से यह किला छीना था। तानाजी के बलिदान पर शिवाजी महाराज ने कहा था—"गढ़ आला, पण सिंह गेला" (गढ़ तो आया, पर सिंह चला गया)।

  9. पन्हाला दुर्ग (कोल्हापुर): इस विशाल पठारीय दुर्ग में छत्रपति शिवाजी महाराज को सिद्दी जौहर ने घेर लिया था। तब बाजीप्रभु देशपांडे ने 'पावनखिंड' के दर्रे में मुगलों को रोककर शिवाजी को सुरक्षित विशालगढ़ पहुँचाने के लिए अपने प्राण न्योछावर किए थे।

  10. विजयदुर्ग (सिंधुदुर्ग): 'पूर्वी जिब्राल्टर' कहे जाने वाले इस नौसैनिक किले के चारों ओर समुद्र के भीतर 300 मीटर लंबी और 3 मीटर ऊंची एक गुप्त दीवार पानी में डूबी बनाई गई थी, जिससे अनजान दुश्मन के जहाज टकराकर डूब जाते थे।

  11. लोहागढ़ दुर्ग (पुणे): अपनी 1.5 किलोमीटर लंबी तीखी कटक जैसी प्राकृतिक चट्टान 'विंचुकाटा' (बिच्छू का डंक) के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ से पूरे पवन मावल क्षेत्र पर निगरानी रखी जाती थी।

  12. तोरणा दुर्ग (पुणे): 1646 में मात्र 16 वर्ष की आयु में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा जीता गया पहला किला था। इसका मूल नाम 'प्रचंडगढ़' था।

  13. हरिश्चंद्रगढ़ (अहमदनगर): 6वीं सदी के कलचुरी वंश से जुड़ा यह दुर्ग अपने 'कोंकण कड़ा' (Konkan Kada) के लिए जाना जाता है, जहाँ हवा का दबाव इतना अधिक होता है कि ऊपर से फेंकी गई हल्की चीजें नीचे गिरने के बजाय वापस ऊपर उड़ आती हैं।

  14. सुवर्णदुर्ग (रत्नागिरी): समुद्र के बीच बना मराठा नौसेना का मुख्य शिप-बिल्डिंग बेस, जहाँ कान्होजी आंग्रे के जहाजी बेड़े की मरम्मत की जाती थी।

  15. चाकन का संग्राम दुर्ग (पुणे): 1660 में मराठा सेनापति फिरंगोजी नरसाला ने मुगल सूबेदार शाइस्ता खान की 20,000 की सेना के खिलाफ सिर्फ 300 सैनिकों के साथ 56 दिनों तक इस मैदानी किले की रक्षा की थी।

  16. अजिंक्यतारा (सतारा): 16वीं सदी का यह दुर्ग शाहूजी महाराज के समय मराठा राजनीति का शीर्ष सत्ता केंद्र बना था।

  17. अर्नाला दुर्ग (पालघर): वैतरणा नदी के मुहाने पर समुद्र में स्थित यह द्वीप दुर्ग पुर्तगाली और मराठा नौसैनिक संघर्षों का साक्षी रहा।

  18. महिपतगढ़ (रत्नागिरी): 120 एकड़ के घने जंगल और पठार पर बना यह महाराष्ट्र के सबसे बड़े दुर्गों में से एक है, जिसकी प्राचीरों को प्राकृतिक रूप से जामुन और सागौन के पेड़ों से ढका गया था।

  19. वसंतगढ़ (कराड): कृष्णा नदी के किनारे बसा यह किला प्राचीन काल से व्यापारिक मार्गों का प्रहरी था।

  20. सज्जनगढ़ (सतारा): समर्थ रामदास स्वामी की समाधि स्थल होने के कारण यह दुर्ग सैन्य इतिहास के साथ-साथ महाराष्ट्र के आध्यात्मिक पुनर्जागरण का प्रतीक है।

दक्षिण भारत के दुर्ग (63 से 78)

  1. गोलकुंडा दुर्ग (हैदराबाद, तेलंगाना): ध्वनिकी (Acoustics) का बेजोड़ चमत्कार। किले के मुख्य प्रवेश द्वार (फतेह दरवाजा) के गुंबद के नीचे ताली बजाने पर उसकी गूंज 1 किलोमीटर दूर पहाड़ी के शीर्ष पर स्थित 'बाला हिसार' के दरबार में स्पष्ट सुनाई देती है।

  2. कोहिनूर की खान (गोलकुंडा): विश्वप्रसिद्ध कोहिनूर, होप डायमंड और दरिया-ए-नूर जैसे ऐतिहासिक हीरे गोलकुंडा की खदानों (कोल्लूर माइन) से निकले थे और उनका व्यापार इसी किले के बाजार से होता था।

  3. जिंजी दुर्ग (तमिलनाडु): छत्रपति शिवाजी महाराज ने इसे "भारत का सबसे अभेद्य किला" कहा था, जबकि अंग्रेजों ने इसे "ट्रॉय ऑफ द ईस्ट" (Troy of the East) की उपाधि दी थी। यह तीन अलग-अलग पहाड़ियों (राजगिरि, कृष्णागिरि और चंद्रागिरि) को मिलाकर बना है।

  4. श्रीरंगपट्टनम दुर्ग (कर्नाटक): कावेरी नदी के द्वीप पर स्थित टीपू सुल्तान की राजधानी। 4 मई 1799 को चौथे आंग्ल-मैसूर युद्ध में टीपू सुल्तान इसी किले के जल-द्वार (वॉटर गेट) पर अंग्रेजों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे।

  5. रॉकेट अनुसंधान का उद्गम (श्रीरंगपट्टनम): दुनिया में पहली बार युद्ध के मैदान में लोहे के खोल वाले 'मैसूरी रॉकेट्स' (Mysorean Rockets) का इस्तेमाल हैदर अली और टीपू सुल्तान ने इसी किले के तोपखाने से अंग्रेजों के विरुद्ध किया था।

  6. बीदर का किला (कर्नाटक): बहमनी और बरीद शाही का यह किला अपनी 'कारीज़' (Karez) प्रणाली के लिए विश्वविख्यात है। यह भूमिगत नहरों का एक प्राचीन फारसी नेटवर्क था, जो जमीन के नीचे मीलों दूर से पानी किले के भीतर लाता था।

  7. महमूद गवां का मदरसा (बीदर): 1472 ईस्वी में निर्मित इस किले परिसर में मध्यकालीन इस्लामी दुनिया का विशाल विश्वविद्यालय था, जिसमें 3,000 से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियों का पुस्तकालय था।

  8. वारंगल दुर्ग (तेलंगाना): काकतीय राजवंश की 12वीं सदी की राजधानी। यहाँ ग्रेनाइट पत्थर से तराशे गए चार अलंकृत 'कीर्ति तोरण' (काकतीय कला तोरण) स्थित हैं, जो आज तेलंगाना सरकार का आधिकारिक राज्य-प्रतीक हैं।

  9. चित्रदुर्ग का किला (कर्नाटक): सात परकोटों वाला यह 'कल्लिना कोटे' (पत्थरों का किला) कभी पानी की कमी से नहीं जूझा। यहाँ की वीरांगना 'ओनाके ओबव्वा' ने मूसल (Pestle) से अकेले ही हैदर अली के सैकड़ों सैनिकों को गुप्त सुरंग से घुसते समय मार गिराया था।

  10. बेकल फोर्ट (कासरगोड, केरल): केरल का सबसे बड़ा और प्रमुख तटीय दुर्ग, जो समुद्र के पानी में आगे की ओर झुका हुआ है। इसमें कोई महल या प्रशासनिक भवन नहीं, बल्कि यह पूरी तरह से एक सैन्य तोपखाना और निगरानी चौकी के रूप में बनाया गया था।

  11. गंडिकोटा दुर्ग (आंध्र प्रदेश): पेन्नार नदी द्वारा लाल ग्रेनाइट चट्टानों को काटकर बनाई गई 300 फीट गहरी प्राकृतिक घाटी (गॉर्ज) के मुहाने पर स्थित है। इसे "भारत का ग्रैंड कैन्यन" (Grand Canyon of India) कहा जाता है।

  12. वेल्लोर दुर्ग (तमिलनाडु): 16वीं सदी में विजयनगर साम्राज्य के सामंतों द्वारा निर्मित इस किले के चारों ओर एक विशाल खाई (Moat) है, जिसमें कभी 10,000 से अधिक खूंखार मगरमच्छ पाले जाते थे। 1806 में ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ पहला सिपाही विद्रोह (वेल्लोर म्यूटिनी) यहीं हुआ था।

  13. पालक्कड़ दुर्ग (टीपू का किला, केरल): 1766 में हैदर अली द्वारा पुनर्निर्मित यह किला पश्चिमी घाट के पालक्कड़ दर्रे की सुरक्षा के लिए ग्रेनाइट पत्थरों से बनाया गया था।

  14. कन्नूर का सेंट एंजेलो फोर्ट (केरल): 1505 में पहले पुर्तगाली वायसराय फ्रांसिस्को डी अल्मीडा द्वारा अरब सागर के तट पर निर्मित यह किला यूरोपियनों द्वारा भारत में बनाए गए सबसे शुरुआती किलों में से एक है।

  15. उदयगिरि दुर्ग (कन्याकुमारी, तमिलनाडु): 1741 के ऐतिहासिक कोलाचेल युद्ध में त्रावणकोर के महाराजा मार्तंड वर्मा ने डच (हॉलैंड) सेना को पराजित किया था। पकड़े गए डच कमांडर यूस्टाचियस डी लैनॉय को इसी किले में बंदी बनाया गया, जो बाद में त्रावणकोर सेना का मुख्य कमांडर बना।

  16. मदुक्कराई किला (तमिलनाडु): चोल, चेर और पांड्य साम्राज्यों की सीमाओं को विभाजित करने वाली प्राचीन सुरक्षा प्राचीर के अवशेष यहाँ मिलते हैं।

उत्तर और पूर्वी भारत के दुर्ग (79 से 92)

  1. कांगड़ा दुर्ग (हिमाचल प्रदेश): त्रिगर्त रियासत द्वारा निर्मित यह भारत का सबसे पुराना दर्ज पहाड़ी किला माना जाता है, जिसका उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। महमूद गजनवी (1009 ई.) से लेकर मुगलों तक ने इसके अकूत खजाने के लिए इस पर 50 से अधिक बार हमले किए।

  2. लाल किला (दिल्ली): उस्ताद अहमद लाहौरी की वास्तुकला वाला यह किला मूल रूप से 'किला-ए-मुबारक' कहलाता था। 1739 में फारस के नादिर शाह ने इस पर कब्जा कर मयूर सिंहासन (तख्त-ए-ताऊस) और कोहिनूर हीरा यहीं से लूटा था।

  3. आगरा का किला (उत्तर प्रदेश): यूनेस्को धरोहर स्थल, जहाँ मुगल बादशाह शाहजहां को उनके अंतिम दिनों में उनके पुत्र औरंगजेब द्वारा 'मुसम्मन बुर्ज' में कैद रखा गया था, जहाँ से वे ताजमहल को निहारा करते थे।

  4. इलाहाबाद (प्रयागराज) का किला (उत्तर प्रदेश): गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर अकबर द्वारा 1583 में निर्मित। इसके भीतर अमर 'अक्षयवट' वृक्ष और 232 ईसा पूर्व का अशोक स्तंभ आज भी सुरक्षित है।

  5. झांसी का किला (उत्तर प्रदेश): बंगरा पहाड़ी पर ओरछा के राजा बीरसिंह देव द्वारा 1613 में निर्मित। 1858 के संग्राम में महारानी लक्ष्मीबाई ने अपने दत्तक पुत्र दामोदर राव को पीठ पर बांधकर इसी किले की प्राचीर से अपने घोड़े 'बादल' के साथ ऐतिहासिक छलांग लगाई थी।

  6. कालिंजर दुर्ग (बांदा, उत्तर प्रदेश): विंध्य पर्वत पर स्थित यह दुर्ग गुप्त काल से लेकर चंदेलों तक का केंद्र रहा। 1545 ईस्वी में इस किले की घेराबंदी के दौरान 'उक्का' नामक आग्नेयास्त्र (रॉकेट) दीवार से टकराकर वापस फटने से अफगान शासक शेरशाह सूरी की मृत्यु हुई थी।

  7. नीलकंठ मंदिर (कालिंजर): कालिंजर दुर्ग के भीतर 18 भुजाओं वाली भगवान शिव की काल-अग्नि स्वरूप की विशाल गुफा-प्रतिमा स्थित है, जहाँ शिव ने विषपान के बाद तपस्या की थी।

  8. रोहतासगढ़ दुर्ग (सासाराम, बिहार): सोन नदी की घाटी में कैमूर की पहाड़ियों पर स्थित 28 वर्ग मील में फैला यह भारत के सबसे विशाल किलों में से एक है। शेरशाह सूरी ने इसे अपना मुख्य रक्षा केंद्र बनाया था।

  9. मुंगेर का किला (बिहार): मीर कासिम ने 1762 में अंग्रेजों से बचने के लिए अपनी राजधानी मुर्शिदाबाद से मुंगेर स्थानांतरित की थी और इस किले के भीतर उन्नत बंदूक और तोप निर्माण कारखाना स्थापित किया था, जिसके कारीगर आज भी यहाँ प्रसिद्ध हैं।

  10. किला मुबारक (पटियाला, पंजाब): 1763 में बाबा आला सिंह द्वारा कच्ची गढ़ी के रूप में शुरू हुआ यह किला सिख स्थापत्य शैली और दुर्लभ शीशों के काम के लिए प्रसिद्ध है।

  11. अमृतसर का गोबिंदगढ़ किला (पंजाब): 1805 में महाराजा रणजीत सिंह द्वारा अपने खजाने और तोपखाने की सुरक्षा के लिए बनवाया गया। इसके खजाने की रक्षा का दायित्व प्रसिद्ध सिख योद्धा अकाली फूला सिंह के पास था।

  12. तोरसा नदी का बक्सा फोर्ट (पश्चिम बंगाल): भूटान सीमा के पास स्थित यह किला पहले भूटानी राजाओं का था। बाद में अंग्रेजों ने इसे भारत के सबसे दुर्गम 'डिटेंशन कैंप' में तब्दील कर दिया, जहाँ सुभाष चंद्र बोस के सहयोगियों और क्रांतिकारियों को कैद रखा जाता था।

  13. कुरुंबर दुर्ग (ओडिशा): 15वीं सदी में गजपति कपिलेंद्र देव द्वारा निर्मित यह किला हिंदू मंदिर स्थापत्य और सैन्य सुरक्षा का अनूठा समन्वय है।

  14. बारबाटी दुर्ग (कटक, ओडिशा): 13वीं सदी में गंग वंश के राजा मुकुंददेव द्वारा महानदी के तट पर निर्मित 9 मंजिला महल वाला दुर्ग था, जिसके आज केवल प्रवेश द्वार और गहरी सुरक्षा खाई शेष है।

गुजरात, दमन और पूर्वोत्तर के दुर्ग (93 से 100)

  1. उपरकोट किला (जूनागढ़, गुजरात): 319 ईसा पूर्व में चंद्रगुप्त मौर्य के समय स्थापित। इस किले के भीतर बौद्ध गुफाएं, 300 फीट से अधिक गहरी 'अड़ी-कड़ी वाव' और 'नवघन कुआं' स्थित हैं, जिन्हें चट्टानों को काटकर बनाया गया था।

  2. दीव फोर्ट (दमन और दीव): 1535 में पुर्तगालियों और गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह के बीच हुए समझौते के बाद निर्मित। यह तीन तरफ से अरब सागर से घिरा है और यहाँ 400 साल पुरानी पीतल की पुर्तगाली तोपें आज भी समुद्र की ओर तैनात हैं।

  3. पावागढ़-चंपानेर दुर्ग (गुजरात): यूनेस्को विश्व धरोहर। पावागढ़ की पहाड़ी पर महाकाली शक्तिपीठ और नीचे 15वीं सदी की सुल्तान महमूद बेगड़ा की राजधानी चंपानेर का किला सैन्य जल-संरक्षण का अद्वितीय उदाहरण है।

  4. लखपत का किला (कच्छ, गुजरात): सिंधु नदी के मुहाने पर स्थित यह 7 किलोमीटर लंबी प्राचीर वाला किला 1819 के भीषण कच्छ भूकंप से पहले एक संपन्न बंदरगाह था; भूकंप के बाद सिंधु नदी का मार्ग बदलने से यह नगर वीरान हो गया।

  5. इटाफोर्ट (ईटानगर, अरुणाचल प्रदेश): पूर्वोत्तर भारत का एक दुर्लभ किला, जिसका निर्माण 14वीं-15वीं सदी में जितारी राजवंश के समय लाखों पक्की लाल ईंटों से किया गया था (पूर्वोत्तर के अधिकांश किले लकड़ी या बांस के होते थे)।

  6. सरायघाट की किलाबंदी (गुवाहाटी, असम): 1671 में ब्रह्मपुत्र नदी के संकरे पाट पर अहोम सेनापति लाचित बोरफुकन ने मिट्टी और बांस के विशाल नदी-दुर्ग (Riverine Fortifications) बनाकर औरंगजेब की विशाल मुगल नौसेना को बुरी तरह परास्त किया था।

  7. सिमलगढ़ दुर्ग (असम): अहोम साम्राज्य का एक रणनीतिक जल-स्थल दुर्ग, जो मुगलों के हमलों के खिलाफ ब्रह्मपुत्र घाटी का मजबूत सुरक्षा कवच था।

  8. दमन का मोती दमन किला (दमन): 16वीं सदी में पुर्तगालियों द्वारा निर्मित 30,000 वर्ग मीटर में फैला एक विशाल यूरोपीय शैली का पेंटागोनल (पंचकोणीय) किला, जिसकी प्राचीर से दमनगंगा नदी और समुद्र का संगम दिखाई देता है।


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