MP Breaking News: मुरैना में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर को सिविल लाइन थाना पुलिस ने दुष्कर्म की धाराओं में गिरफ्तार किया है। एक युवती ने शादी का झांसा देकर शासकीय आवास और कार में शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया है। जानिए पूरी रिपोर्ट।
मुरैना (नरवर समाचार डेस्क)। मध्य प्रदेश के प्रशासनिक अमले से इस समय की सबसे बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। मुरैना जिले में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर अरविंद सिंह माहौर को पुलिस ने एक युवती की शिकायत पर दुष्कर्म (Rape) की संगीन धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया है।
मामला दर्ज होने के तुरंत बाद एक्शन में आई मुरैना की सिविल लाइन थाना पुलिस ने डिप्टी कलेक्टर को हिरासत में लिया, जिसके बाद जिला अस्पताल में उनका मेडिकल चेकअप कराया गया और उन्हें न्यायालय (Court) में पेश किया गया है।
🚨 क्या है पूरा मामला? शादी का झांसा देकर शोषण का आरोप
पुलिस सूत्रों और पीड़ित युवती द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर और पीड़िता के बीच पिछले कुछ समय से जान-पहचान और बातचीत थी।
शासकीय आवास और कार में संबंध: पीड़िता का आरोप है कि जब अरविंद माहौर सबलगढ़ में एसडीएम (SDM) के पद पर पदस्थ थे, तब उन्होंने अपने शासकीय आवास पर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।
इसके अलावा, ग्वालियर स्थित एक फ्लैट और कार में भी युवती के साथ संबंध बनाने की बात सामने आई है। शादी से मुकरने पर खुला राज: यह सिलसिला लंबे समय तक चलता रहा, लेकिन जब पिछले दिनों युवती ने उन पर शादी करने का दबाव बनाया, तो डिप्टी कलेक्टर ने साफ तौर पर शादी करने से इनकार कर दिया
। धोखा मिलने के बाद पीड़िता ने सीधे पुलिस की शरण ली।
📱 पुलिस के हाथ लगे पुख्ता सबूत और वीडियो
युवती ने केवल शिकायत ही दर्ज नहीं कराई, बल्कि पुलिस को अपने दावों के समर्थन में कई अहम डिजिटल सबूत भी सौंपे हैं। बताया जा रहा है कि युवती के मोबाइल फोन में कुछ ऐसे वीडियो और चैट्स मौजूद हैं, जिनसे शारीरिक संबंध बनाए जाने और प्रताड़ना की पुष्टि होती है।
🚫 विवादों से रहा है पुराना नाता: सीएम मोहन यादव कर चुके हैं सस्पेंड
डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर का विवादों से बहुत पुराना और गहरा नाता रहा है।
अमर्यादित भाषा पर हुए थे सस्पेंड: सबलगढ़ एसडीएम रहते हुए उनका एक ऑडियो और वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था।
उस ऑडियो में वे एक फरियादी महिला की बेटी और बहू को लेकर बेहद आपत्तिजनक और अपशब्दों का इस्तेमाल करते सुनाई दे रहे थे। इस अमर्यादित व्यवहार पर कड़ा संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया था। फरियादी को थप्पड़ मारने की धमकी: इसके बाद जुलाई 2025 में भी उनका एक और वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे अपने ऑफिस में आए एक सामाजिक कार्यकर्ता को बात सुनने के बजाय अपने गनर से बाहर निकलवाने और थप्पड़ मारने की धमकी देते नजर आए थे।
🎯 निष्कर्ष: प्रशासन पर उठे सवाल
एक प्रशासनिक अधिकारी, जिसके कंधे पर जिले की कानून व्यवस्था और जनता को न्याय दिलाने की जिम्मेदारी होती है, उसके खुद इस तरह के संगीन अपराध में गिरफ्तार होने से शासन की छवि पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून सबके लिए बराबर है और मामले की पूरी निष्पक्षता से जांच की जा रही है।
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