Parama Ekadashi 2026: अधिकमास की कृष्ण पक्ष की दुर्लभ परमा एकादशी का व्रत कब है? जानिए सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, व्रत के कड़े नियम और दरिद्रता दूर करने वाली पौराणिक व्रत कथा।
धार्मिक डेस्क (नरवर समाचार)। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल ज्येष्ठ अधिकमास चल रहा है, जिसके कृष्ण पक्ष की एकादशी को 'परमा एकादशी' या 'परमा शुद्ध एकादशी' कहा जाता है। चूंकि यह अतिरिक्त चंद्र मास (Leap Month) में आती है, इसलिए धार्मिक शास्त्रों में इस व्रत को नियमित 24 एकादशियों से भी श्रेष्ठ और तुरंत फल देने वाला बताया गया है।
माना जाता है कि इस दिन पूरी निष्ठा से श्रीहरि भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से व्यक्ति को घोर दरिद्रता से मुक्ति मिलती है, स्वर्ण दान के समान पुण्य मिलता है और अंत में वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं इस साल इस व्रत की तारीख, मुहूर्त और पूजा से जुड़े सभी प्रामाणिक नियम।
📅 परमा एकादशी 2026: तिथि और पारण का शुभ मुहूर्त (Date & Timings)
पंचांग और ड्रिक पंचांग (Drik Panchang) के सटीक गणित के अनुसार, इस बार तिथि को लेकर किसी भी प्रकार का संशय नहीं है:
परमा एकादशी व्रत की तारीख: 11 जून 2026 (दिन: गुरुवार)
एकादशी तिथि का प्रारंभ: 11 जून 2026 को अर्धरात्रि 12:57 AM बजे से
एकादशी तिथि का समापन: 12 जून 2026 को रात्रि 10:36 PM बजे तक
व्रत पारण (Fast Breaking) का समय: 12 जून 2026 (शुक्रवार) को सुबह 05:23 AM से 08:10 AM के बीच
विशेष संयोग: गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को ही समर्पित होता है, और उसी दिन एकादशी का आना इस व्रत के महत्व को कई गुना बढ़ा रहा है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और शोभन योग का भी निर्माण हो रहा है, जो नए कार्यों की शुरुआत और समृद्धि के लिए अत्यंत शुभ हैं。
📜 परमा एकादशी का महत्व (Significance of the Vrat)
स्कंद पुराण के अनुसार, परमा एकादशी के दिन किए जाने वाले व्रत और दान का फल अश्वमेध यज्ञ के समान होता है।
कुबेर देव को मिला खजाना: मान्यताओं के अनुसार, धन के देवता कुबेर ने भी पूर्वजन्म में इस कठिन व्रत का पालन किया था, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें देवताओं का कोषाध्यक्ष (Treasurer) बना दिया था।
राजा हरिश्चंद्र को वापस मिला राजपाठ: सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने जब अपना सब कुछ खो दिया था, तब महर्षि के कहने पर उन्होंने अधिकमास की इस एकादशी का व्रत किया, जिसके प्रभाव से उन्हें अपनी पत्नी, पुत्र और खोया हुआ राज्य वापस मिला था।
🚫 परमा एकादशी व्रत के कड़े नियम (Fasting Rules)
यदि आप इस व्रत का पूरा फल पाना चाहते हैं, तो शास्त्रों में बताए गए इन नियमों का पालन कड़ाई से करें:
दशमी से ही तैयारी: व्रत की शुरुआत एक दिन पहले यानी दशमी की रात से ही हो जाती है। दशमी की रात को सात्विक भोजन करें (बिना लहसुन-प्याज का) और तामसिक विचारों से दूर रहें।
अन्न और अनाज का पूर्ण त्याग: एकादशी के दिन चावल, गेहूं, दालें, मक्का, और बीन्स (फलियां) खाना पूरी तरह वर्जित है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन अन्न में पापों का वास होता है।
व्रत के प्रकार: जो लोग शारीरिक रूप से पूर्ण स्वस्थ हैं, वे निर्जला व्रत (बिना पानी के) रख सकते हैं। सामान्य लोग फलाहार, दूध, और जल का सेवन करके (आंशिक व्रत) भी यह पूजा कर सकते हैं।
तुलसी दल न तोड़ें: एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना महापाप माना गया है। पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले (दशमी को) ही तोड़कर रख लें।
दिन में सोने से बचें: व्रत के दिन दिन में सोने (Daytime Sleeping) की मनाही होती है। इस समय का उपयोग विष्णु सहस्रनाम के पाठ, भजन-कीर्तन या नारायण के महामंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवायके जाप में करना चाहिए।
🪔 भगवान विष्णु पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)
सुबह ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 04:02 से 04:42) में उठकर स्नान करें और पीले या सफेद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
अपने घर के मंदिर की सफाई करें और एक लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
भगवान के सम्मुख देशी घी का दीपक जलाएं और व्रत का संकल्प (Sankalp) लें।
भगवान को पंचामृत, पीले फूल, अक्षत (बिना टूटे हुए चावल), फल, मिठाई और विशेष रूप से तुलसी पत्र अर्पित करें।
शाम के समय परमा एकादशी की प्रामाणिक व्रत कथा पढ़ें या सुनें और कपूर से आरती करें।
अगले दिन (12 जून) सुबह सूर्योदय के बाद तय पारण समय के भीतर किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन/दान देकर ही अपना व्रत खोलें।
📖 पौराणिक व्रत कथा: ब्राह्मण सुमेधा और पवित्रा की कहानी
काम्पिल्य नगरी में 'सुमेधा' नाम के एक अत्यंत धर्मात्मा ब्राह्मण अपनी पतिव्रता पत्नी 'पवित्रा' के साथ रहते थे। वे दोनों बहुत ही गरीब थे, कई बार स्थिति ऐसी होती कि उन्हें कई दिनों तक भूखा रहना पड़ता था। इसके बावजूद वे अपने घर आए किसी भी अतिथि का सत्कार करना नहीं भूलते थे।
एक दिन उनके घर महर्षि कौंडिन्य पधारे। ब्राह्मण दंपत्ति ने अपनी सामर्थ्य से बढ़कर ऋषि की सेवा की。 पवित्रा ने आदरपूर्वक ऋषि से अपनी दरिद्रता को दूर करने का उपाय पूछा。 तब महर्षि कौंडिन्य ने उन्हें बताया कि, "अधिकमास के कृष्ण पक्ष में आने वाली 'परमा एकादशी' का व्रत करने से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं और कुबेर के समान धन-धान्य का आशीर्वाद देते हैं। तुम दोनों इस व्रत को विधि-विधान से करो。"
महर्षि के कहे अनुसार सुमेधा और पवित्रा ने पूर्ण श्रद्धा के साथ परमा एकादशी का व्रत और रात्रि जागरण किया। व्रत के प्रभाव से भगवान विष्णु प्रकट हुए और उनकी दरिद्रता को हमेशा के लिए समाप्त कर उन्हें अपार सुख-समृद्धि और अंत में मोक्ष प्रदान किया।
🎯 निष्कर्ष (Conclusion)
परमा एकादशी आत्मा के शुद्धिकरण, आत्म-नियंत्रण और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का दिन है। तीन साल में मिलने वाले इस महान अवसर को व्यर्थ न जाने दें और श्रद्धापूर्वक भगवान श्रीहरि की आराधना करें।
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